8वीं पास प्रधान कैसे कर सकता है शिक्षक की नियुक्तिः हाईकोर्ट
हिमाचल हाईकोर्ट ने गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल बुघार तहसील अर्की में तैनात एसएमसी शिक्षक के चयन को अवैध ठहराते हुए उसकी नियुक्ति रद्द कर दी है। एसएमसी ने अध्यापक को पीरियड आधार पर पीजीटी राजनीति शास्त्र के पद के लिए चयनित किया था।
न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी ने याचिकाकर्ता इंद्रा देवी की याचिका को स्वीकारते हुए दोबारा उक्त पद के लिए चयन प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए। कोर्ट ने शिक्षा सचिव को नई चयन प्रक्रिया तीन माह के भीतर पूरा करने के आदेश भी दिए।
कोर्ट ने नियुक्ति को भेदभावपूर्ण मानते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एसएमसी पॉलिसी के तहत चयन समिति में अयोग्य व्यक्तियों को एसएमसी प्रधान होने के नाते सदस्य बनाया जाता है और अध्यापकों की नियुक्तियां की जा रही हैं। प्रार्थी ने याचिका में आरोप लगाया था कि चयन प्रक्रिया में कोई पारदर्शिता नहीं बरती गई।
चयन समिति में आठवीं पास एसएमसी प्रधान को सदस्य बनाया गया। प्रार्थी के अनुसार एक आठवीं पास व्यक्ति पीजीटी राजनीति शास्त्र के पद के लिए योग्य अध्यापक का चयन कैसे कर सकता है।
10 में से दिए सिर्फ 2 नंबर
इसे साबित करने के लिए प्रार्थी ने एसएमसी प्रधान के साक्षात्कार में दिए गए अंकों का उल्लेख करते हुए बताया कि उसने भेदभावपूर्ण 10 में से 2 अंक दिए जबकि चयनित अध्यापक को 10 में से 10 अंक दे दिए। प्रार्थी के अनुसार वह दूसरे अध्यापकों से अच्छी योग्यता रखती है, फिर भी उसे कम अंक देकर नियुक्ति से बाहर कर दिया। बता दें कि प्रदेश में इस तरह के सैकड़ों मामले हो सकते हैं जहां कम पढ़े-लिखे व्यक्ति एसएमसी की चयन प्रक्रिया में शामिल हों।
स्मार्ट सिटी मामले पर फैसला सुरक्षित- प्रदेश हाईकोर्ट ने स्मार्ट सिटी से जुड़े मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा है। न्यायाधीश राजीव शर्मा व न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने शिमला के मेयर संजय चौहान द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। गौरतलब है कि भारत सरकार द्वारा जारी उस अधिसूचना को याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई है जिसके तहत शिमला की बजाय धर्मशाला को स्मार्ट सिटी योजना में शामिल किया गया है।