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HP High Court: अनुबंध सेवा को पुरानी पेंशन के लिए गिना जाए, सेवानिवृत्ति के दिन सुनाया अहम फैसला
Thu, 20 Apr 2023 12:33 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Thu, 20 Apr 2023 12:33 PM IST
सार
याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष दलील दी कि उसकी नियुक्ति चिकित्सक के रूप में 31 जनवरी 1997 में अनुबंध आधार पर की गई थी। उसकी सेवाओं को वर्ष 2007 में नियमित किया गया।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अनुबंध सेवा को पेंशन के लिए गिने जाने के मामले में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने अनुबंध सेवा को पुरानी पेंशन के लिए गिने जाने के आदेश दिए हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सबीना 62 वर्ष की आयु पूरी होने पर बुधवार को सेवानिवृत्त हुईं। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी की सेवा योग्यता उस तारीख से शुरू होती है, जिस तारीख से वह कार्यभार ग्रहण करता है। चाहे वह नियुक्ति अस्थायी हो या स्थायी।
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यदि अस्थायी नियुक्ति बिना किसी रुकावट के स्थायी नियुक्ति में निहित होती है तो ऐसी स्थिति में अनुबंध सेवा को सीसीएस (पेंशन) नियम, 1972 की प्रयोज्यता के उद्देश्य के लिए गिना जाना उचित है। अदालत ने डॉक्टर उमेश कुमार की याचिका को स्वीकार करते हुए यह निर्णय सुनाया। अदालत ने सरकार के 18 अक्तूबर 2021 के उस निर्णय को रद्द कर दिया, जिसके तहत याचिकाकर्ता को पेंशन का लाभ न दिए जाने का निर्णय लिया गया था।
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याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष दलील दी कि उसकी नियुक्ति चिकित्सक के रूप में 31 जनवरी 1997 में अनुबंध आधार पर की गई थी। उसकी सेवाओं को वर्ष 2007 में नियमित किया गया। दलील दी गई कि सरकार ने दस वर्ष तक उसकी सेवाओं को नियमित नहीं किया, जबकि उसे स्थायी कर्मचारी के सभी सेवा भत्ते दिए।
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वर्ष 2010 में विभाग ने याचिकाकर्ता और समानांतर कर्मचारियों को आदेश दिए कि वे नई पेंशन स्कीम (अंशदायी पेंशन स्कीम) के भागीदारी बनें। याचिकाकर्ता और अन्य ने इस निर्णय को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी। अदालत ने अंतरिम आदेश पारित कर इन आदेशों को स्थगित कर दिया था और बाद में 30 नवंबर 2010 को फैसला सुनाते हुए इन्हें पुरानी पेंशन का लाभ दिए जाने के आदेश दिए थे।
अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता 31 दिसंबर 2020 को सेवानिवृत्त हो गया था। उसके बाद विभाग ने उसे पुरानी पेंशन का लाभ दिए जाने के निर्णय को खारिज कर दिया। इस निर्णय को याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष चुनौती दी थी।