केंद्र और राज्य सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस
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प्रदेश हाईकोर्ट ने शहरी गरीबों को आवास बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा बजट जारी होने के बावजूद एक भी आवास निर्मित न होने के मामले में केंद्र सरकार और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इस मामले में नगर निगम शिमला को भी प्रतिवादी बनाते हुए याचिका का जवाब दायर करने के आदेश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता नमिता मनिकटाला की याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के बाद सभी प्रतिवादियों को छह सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट और जवाब दायर करने के आदेश दिए।
केंद्र ने दिए 6 करोड़, नहीं बना एक भी घर
प्रार्थी ने याचिका में आरोप लगाया है कि मिशन के तहत केंद्र सरकार द्वारा 6 करोड़ 4 लाख 45 हजार रुपये जारी किए गए थे। लेकिन एक भी घर इस फंड के माध्यम से राज्य सरकार ने नहीं बनाया। प्रार्थी ने मांग की है कि राज्य सरकार को इस मिशन के तहत पिछले 10 वर्षों में केंद्र सरकार से आई फंड की जानकारी कोर्ट के समक्ष रखने के आदेश दिए जाएं।
सरकार को मिशन के तहत कारगर कदम उठाते हुए फंड का इस्तेमाल करने के लिए निर्देश देने की मांग भी की गई। इस फंड का इस्तेमाल न करने के लिए दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग भी गई है। मामले पर सुनवाई 29 अक्तूबर को होगी।