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निशानदेही में समय बर्बाद न करें अफसर, दो हफ्ते में छुड़ाएं कब्जे: हाईकोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Updated Thu, 12 Apr 2018 02:05 PM IST
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हाईकोर्ट ने वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त करवाने में निशानदेही के कारण हो रही देरी पर संज्ञान लेते हुए स्पष्ट किया कि वन विभाग स्वयं निशानदेही के लिए आवेदन कर बेदखली को लंबा न खींचें। वन विभाग को जब अपनी भूमि का पता है तो उन्हें निशानदेही करवाने का कोई प्रश्न ही पैदा नहीं होता। यदि किसी को वन विभाग की कार्रवाई से तकलीफ हो तो वो निशानदेही करवाए न कि वन विभाग। मामले पर अगली सुनवाई 25 अप्रैल को होगी।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने कोर्ट में उपस्थित प्रदेश के सभी वन मंडलों के वन अधिकारियों, उपमंडल अधिकारियों और तहसीलदारों को ईमानदारी से अपने-अपने क्षेत्र के सबसे बड़े अवैध कब्जाधारियों पर बिना किसी राजनीतिक और अफसरशाही के दबाव में आकर बड़ी कार्रवाई करने को कहा।
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कोर्ट ने सभी उपस्थित अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर निजी शपथपत्र के माध्यम से कोर्ट को यह बताने के आदेश कि उन्होंने प्रतिदिन के हिसाब से अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की। कोर्ट ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले सभी संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई को सभी प्रकार के मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने के आदेश भी दिए।
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खंडपीठ ने वन भूमि पर अवैध कब्जे के गोरखधंधे का असली दोषी राजस्व विभाग के संबंधित लोगों को ठहराया। कोर्ट ने 5 बीघा से अधिक भूमि पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई न करने पर कड़ा संज्ञान लेते हुए वन विभाग व राजस्व विभाग के बड़े अधिकारियों को हाईकोर्ट के समक्ष तलब किया था।
इन्हें कोर्ट में तलब करने के बाद वन विभाग हरकत में आया और कोर्ट के समक्ष कब्जाधारियों से संबंधित चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए गए। यह कब्जे तब सामने आए जब हाईकोर्ट ने वन व राजस्व विभाग के सभी आला अधिकारियों की क्लास लगाई। चार वर्षों से यह विभाग हाईकोर्ट की आंखों में धूल झोंक रहे थे।
छोटे कब्जाधारियों की लिस्ट सौंप कर समय निकाल व्यतीत कर रहे थे। मामले के लंबित रहते अनेकों लोगों ने मुख्य न्यायाधीश व एमिक्स क्यूरी को पत्र लिख कर बड़े कब्जाधारियों के नाम बताए। वन विभाग की लिस्ट में उन कब्जाधारियों का उल्लेख न होना दर्शाता है कि वन विभाग किस तरह पिक एंड चूज की नीति पर चल रहा है।
13 परिवारों का 2800 बीघा वन भूमि पर कब्जा
शिमला। कोर्ट को बताया गया कि मात्र 13 परिवारों ने करीब 2800 बीघा वन भूमि पर अवैध कब्जा कर सेब के बगीचे लगा रखे हैं। चार वर्षों से हाईकोर्ट द्वारा बड़े कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेशों के बावजूद वन विभाग ने इन कब्जाधारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई करना जरूरी नहीं समझा। हाईकोर्ट ने जिम्मेदार वन मंडलाधिकारियों को निलंबित तक करने की चेतावनी दी, फिर भी उन अफसरों पर कोई असर नहीं हुआ।
इन लोगों ने कब्जाई हुई है वन भूमि
हाईकोर्ट में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार जुब्बल उपमंडल के अंतर्गत पहाड़ गांव के मोतीराम, बबलू और लायक राम के पास संयुक्त रूप से 345 बीघा, इसी गांव के अशोक कुमार, हेमंत ठाकुर व ज्ञान सिंह के पास संयुक्त रूप से 318 बीघा, बर्थाटा गांव के चंपा लाल, भूपेंद्र सिंह, रमेश कुमार व मोहन लाल के पास संयुक्त रूप से 292 बीघा, बर्थाटा व बधाल गांव के
ज्ञानचंद, बलबीर दौलटा, शीशी राम जेटटा, जोगिंद्र व सुरेंद्र के पास संयुक्त रूप से 279 बीघा, बर्थाटा गांव के कुशाल चंद व संतराम के पास संयुक्त रूप से 239 बीघा, पहाड़ गांव के गोवर्धन व सुनील के पास संयुक्त रूप से 199 बीघा, इसी गांव के जोगिंद्र सिंह, अजय सूद, बेली राम, सुनील कुमार के पास संयुक्त रूप से 199 बीघा, धार गांव के प्रकाश धौलटा, बलवंत,
मोहन सिंह, महेंद्र सिंह, जीवन सिंह के पास संयुक्त रूप से 199 बीघा, इसी गांव के नरेंद्र चौहान, प्रमोद, सोहन सिंह बाली व प्रताप चौहान के पास संयुक्त रूप से 199 बीघा, पुराने जुब्बल और बेरली गांव के सुरेंद्र ऑक्टा, गंगाराम रेलु और गोविंद के
पास संयुक्त रूप से 146 बीघा, बलाई गांव के रायसिंह, विपन लाल, उधम सिंह, संतराम व रमेश के पास संयुक्त रूप से 132 बीघा, शिलार गांव के आनंद धानटा, भक्त राम, विजय आनंद, अरुण चंद के पास संयुक्त रूप से 119 बीघा, छाजपुर गांव के राजीव चौहान के पास 110 बीघा वन भूमि पर अवैध कब्जों का पता चला है।
स्कूलों में सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें लगाने की संभावनाएं तलाशने के आदेश
हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिए कि वह कॉरपोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिल्टी (सीएसआर) के तहत निजी कंपनियों के सौजन्य से सभी निजी व सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए जरूरी सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें लगाने की संभावनाएं तलाशे।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने प्रेम मोहिनी गुप्ता द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश जारी किए। इस मामले में हाईकोर्ट ने ट्रायल के तौर पर हाईकोर्ट में ही कम से कम एक ऐसी वेंडिंग मशीन लगाने के आदेश दिए थे।
इन आदेशों के तहत हाईकोर्ट में एक वेंडिंग मशीन लगा दी गई है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया था कि महिलाएं और बच्चियां अपने लिए जरूरी सेनेटरी नेपकिन शर्म के चलते दुकानों से नहीं खरीद पातीं। इस कारण उन्हें मजबूरन कपड़े का इस्तेमाल करना पड़ता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं व बच्चियों द्वारा कपड़े का इस्तेमाल उनके स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। महिलाएं लज्जा के चलते इस्तेमाल किये कपड़े को खुली धूप में नहीं सूखा पातीं हैं और कीटाणु इस कारण समाप्त नहीं होते।
इन कपड़ों के दोबारा इस्तेमाल से उन्हें गंभीर बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। प्रार्थी ने सभी बड़े संस्थानों व स्कूलों में प्राथमिकता के तौर पर इन मशीनों को लगवाने के आदेशों की गुहार लगाई है।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान ये लोग रहे मौजूद
शिमला। बुधवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में रामपुर वृत्त के अंतर्गत आने वाले आनी, रामपुर, कोटगढ़, किनौर, शिमला वृत्त के अंतर्गत चौपाल, ठियोग, शिमला, कुल्लू वृत्त के अंतर्गत बंजार, पार्वती, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, मंडी वृत्त के अंतर्गत
करसोग, नाचन, मंडी, जोगिंद्रनगर, सुंदरनगर, चंबा वृत्त के चंबा, डलहौजी, चुराह, पांगी, भरमौर, धर्मशाला वृत्त में धर्मशाला, पालमपुर, नूरपुर, बिलासपुर वृत्त में बिलासपुर, सिरमौर वृत में राजगढ़, रेणुका जी, नाहन, पांवटा साहिब, सोलन वृत्त में नालागढ़, कुनिहार, हमीरपुर वृत्त में हमीरपुर के वन मंडलाधिकारी और राजस्व अधिकारी उपस्थित थे।