हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट ने दे दी जमानत
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हिमाचल हाईकोर्ट ने धर्मशाला के ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई के लिए मामला मुख्य न्यायाधीश के सामने रखने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने यह निर्देश धर्मशाला ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट द्वारा ऐसे व्यक्ति को जमानत देने के मामले पर दिया है, जिसमें हाईकोर्ट में पहले ही आरोपी की जमानत याचिका को रद्द किया जा चुका है।
धर्मशाला कोर्ट के जमानती आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की अदालत ने दंडाधिकारी के मामले को हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के सामने रखने को कहा है।
कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने आरोपी को जमानत देते हुए यह भी नहीं देखा कि उसकी जमानत याचिका हाईकोर्ट ने पहले ही खारिज कर दी थी।
दाखिले के नाम पर लाखों रुपया ऐंठ लिया
बता दें, धर्मशाला स्थित इंटरेक्टिव फैशन डिजाइनिंग के मैनेजर रवि कुमार के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 के तहत 5 दिसंबर 2015 को धर्मशाला पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था।
जांच के दौरान पाया गया कि संस्थान न तो कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी से संबद्ध है और न ही एक्सेलसियर इंटरेक्टिव सोन्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड से संबद्ध था।
जांच में सामने आया कि 69 छात्रों ने संस्थान में दाखिला लिया था। आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि दाखिले के नाम पर लाखों रुपया ऐंठ लिया गया जबकि उनका संस्थान कानूनी तौर पर मान्यता प्राप्त ही नहीं है।
मामले में पिछले वर्ष कोर्ट ने धर्मशाला में इस संस्थान के मैनेजर रवि कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
जांच अधिकारी को भी लग चुकी है फटकार
साथ ही उसके खिलाफ धोखाधड़ी के मामले की जांच कर रहे अधिकारी को भी तुरंत बदल कर मामले की जांच सीआईए को सौंपने के आदेश दिए थे।
कोर्ट ने जांच अधिकारी को फटकार लगाते हुए कहा था कि यह अधिकारी 5 दिसंबर 2015 को दर्ज प्राथमिकी में अभी तक जरूरी जानकारी जुटाने में विफल रहा है।
इस लिहाज से जांच में जितनी देरी होती है उतने ही सबूत मिटते जाते हैं। इसलिए कोर्ट ने यह जांच सीआईए को सौंपने के आदेश जारी किए। कोर्ट ने संस्थान के मैनेजिंग डायरेक्टर राकेश राणा के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे।