‘अमर उजाला’ की खबर पर हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, IGMC और सरकार से जवाब तलब
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हाईकोर्ट ने आईजीएमसी में खिड़कियों के शीशे टूटने और सेंट्रल हीटिंग सिस्टम ठीक न होने को लेकर राज्य सरकार और आईजीएमसी प्रशासन से जवाब तलब किया है। न्यायालय में सात दिन के भीतर दोनों को स्पष्टीकरण देना होगा।
‘अमर उजाला’ में ‘आईजीएमसी में मरीज ठंड से ठिठुरने के लिए मजबूर’ शीर्षक से 17 नवंबर के अंक में खबर प्रकाशित हुई थी। इस पर न्यायालय ने कड़ा संज्ञान लिया है।
मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने अमर उजाला में इस बाबत छपी खबर पर संज्ञान लेते हुए उपरोक्त आदेश पारित किए।
अमर उजाला ने खबर में खुलासा किया था कि किस तरह आईजीएमसी में कड़ाके की ठंड से मरीजों को जूझना पड़ रहा है।
कंबलों को खिड़की पर लटकाकर मरीज रोकते हैं हवा
अस्पताल में सेंट्रल हीटिंग की व्यवस्था तो है लेकिन खिड़कियों के टूटे शीशे होने की वजह से ठंडी हवाएं सीधे वार्डों में आ रही है। इससे मरीजों समेत तीमारदारों को भी परेशानी हो रही है।
हालत यह है कि अस्पताल के वार्ड और बरामदों में रहने वाले मरीजों के तीमारदार खिड़कियों से आने वाली ठंडी हवा को रोकने के लिए अपने साथ लाए सामान का सहारा ले रहे हैं।
तीमारदार बिस्तरों और कंबलों को खिड़की के साथ टिकाकर हवा को अंदर आने से रोकने को मजबूर हैं। अस्पताल की पहली मंजिल से लेकर ऊपर की ओर की कई मंजिलों की खिड़कियां टूट चुकी हैं।
वहीं, वार्डों की स्थिति भी ऐसी ही है। सेंट्रल हीटिंग सिस्टम से गर्म हवा आना तो दूर यह सिस्टम ठीक ढंग से गर्म भी नहीं हो रहा है। बर्फबारी में तो स्थिति और भी भयानक हो जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी।