हिमाचल हाईकोर्ट: नौतोड़ स्कीम 1975 के मामलों पर सिविल कोर्ट कर सकता है सुनवाई
प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है कि नौतोड़ स्कीम में आने वाले मामले सिविल कोर्ट के क्षेत्राधिकार में आते हैं। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने एकलपीठ की ओर से भेजे गए संदर्भ में यह निर्णय दिया।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है कि नौतोड़ स्कीम में आने वाले मामले सिविल कोर्ट के क्षेत्राधिकार में आते हैं। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने एकलपीठ की ओर से भेजे गए संदर्भ में यह निर्णय दिया। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने खंडपीठ के समक्ष यह संदर्भ भेजा था कि नौतोड़ स्कीम में आने वाले मामले सिविल कोर्ट के क्षेत्राधिकार में आते है या नहीं। तथ्यों के अनुसार करसोग के दीना नाथ को वर्ष 1980 में नौतोड़ स्कीम 1975 में नौतोड़ भूमि आवंटित की गई थी। वर्ष 1984 में उसकी मृत्यु होने के बाद यह जमीन उसके जायज वारसान में बंट गई, जिन्होंने इस जमीन को याचिकाकर्ता को बेच दिया था।
नौतोड़ स्कीम 1975 के प्रावधानों के अनुसार न तो दीना नाथ ने और न ही उसके जायज वारसान ने नौतोड़ भूमि को दो वर्ष के भीतर कृषि योग्य बनाया। ऐसे में उपायुक्त मंडी ने इस नौतोड़ भूमि को सरकार में निहित करने के आदेश पारित किए। याचिकाकर्ता ने उपायुक्त के आदेशों को सिविल कोर्ट ने चुनौती दी लेकिन सिविल कोर्ट ने हाईकोर्ट की एकल पीठ की ओर से दिए गए निर्णय के अनुसार याचिकाकर्ता के दावे को खारिज कर दिया। एकल पीठ ने यह व्यवस्था दी थी कि नौतोड़ स्कीम में आने वाले मामले सिविल कोर्ट के क्षेत्राधिकार में नहीं आते हैं। सिविल कोर्ट के इस निर्णय को प्रार्थी ने हाईकोर्ट की एकल पीठ के समक्ष चुनौती दी। हाईकोर्ट की एकलपीठ की ओर से पहले दिए गए निर्णय को देखते हुए एकल पीठ ने खंडपीठ के समक्ष यह संदर्भ भेजा था कि नौतोड़ स्कीम में आने वाले मामले सिविल कोर्ट के क्षेत्राधिकार में आते है या नहीं।
कांगड़ा की थुरल पंचायत में स्टोन क्रशर पर मुख्य सचिव को नोटिस
कांगड़ा जिले की थुरल पंचायत में स्टोन क्रशर लगाने की अनुमति दिए जाने के मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफ ीक और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने ग्राम पंचायत थुरल निवासियों की ओर से मुख्य न्यायाधीश के नाम लिखे पत्र पर कार्रवाई की है। खंडपीठ ने प्रदेश के मुख्य सचिव सहित सचिव राजस्व, डीसी कांगड़ा और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है। पत्र के माध्यम से आरोप लगाया गया है कि कांगड़ा जिले की थुरल पंचायत में न्यूगल खड्ड पर स्टोन क्रशर स्थापित करने के लिए राज्य सरकार ने अनुमति प्रदान की है।
इस खड्ड पर दो मोक्ष धाम, दो पीने के पानी की स्कीमें और एक लकड़ी का पुल है। स्टोन क्रशर लगने के कारण खड्ड का पानी दूषित हो रहा है और पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है। अदालत ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश दिए हैं कि वह इस स्टोन क्रशर का निरीक्षण करें और अदालत को बताया जाए कि क्या स्टोन क्रशर लगने के कारण खड्ड का पानी दूषित हो रहा है या नहीं, क्या पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है, इस बारे भी रिपोर्ट दायर किए जाने के आदेश दिए हैं। इस मामले की सुनवाई आगामी 15 जून को निर्धारित की गई है।