सड़क हादसों में हो रही मौतों पर अदालत में क्या बोले सीजे?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
परिवार से किसी सदस्य का दुर्घटना में खोने का दर्द उसके परिवार के लोग ही समझ सकते हैं। यह बात मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर ने हाईकोर्ट में आयोजित प्री. लिटिगेशन मध्यस्थता अदालत में कही। यह अदालत एचआरटीसी बस दुर्घटनाओं में पीड़ित लोगों के लिए आयोजित की गई।
इसमें मई महीने में बस दुर्घटना के बारे में विस्तृत चर्चा की गई। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायाधीश संजय करोल, न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी, न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान, न्यायाधीश पीएस राणा, न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर, न्यायाधीश विवेक ठाकुर, न्यायाधीश अजय मोहन गोयल, न्यायाधीश संदीप शर्मा और न्यायाधीश सीबी बारोवालिया भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
इस कार्यक्रम का आयोजन राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से किया गया। मध्यस्थता अदालत कार्यक्रम में ठियोग, करसोग और जोगिन्द्रनगर में एचआरटीसी बस दुर्घटनाओं के बारे में विस्तृत चर्चा हुई। इन दुर्घटनाओं में 25 लोगों की मौत और 150 लोग घायल हो गए थे। मृतकों के आश्रितों ने भी इस मध्यस्थता अदालत की प्रक्रिया में भाग लिया।
बोले, हिमाचल हाईकोर्ट में दुर्घटनाओं से जुड़े 12000 मामले निपटाए
इसमें एचआरटीसी के अधिकारी भी पहुंचे। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर ने कहा कि परिवार के किसी सदस्य का दुर्घटना में खोने का दर्द केवल पीड़ित परिवार ही समझ सकता है। उन्होंने कहा कि केवल मोटर वाहन दुर्घटनाओं से जुड़े 37000 मामले जम्मू-कश्मीर में और करीब 12000 मामले हिमाचल हाईकोर्ट में निपटाए हैं।
हिमाचल में ही इन फैसलों के कारण करीब 50 करोड़ रुपये पीड़ितों को वितरित किए जा चुके हैं। हर शुक्रवार को मोटर वाहन दुर्घटनाओं से जुड़ी अपीलों को वह स्वयं निपटारा करते हैं। न्यायाधीश संजय करोल ने कहा कि प्री लिटिगेशन मध्यस्थता अदालत प्रदेश में पहली बार आयोजित किया जा रहा है। जस्टिस संजय करोल ने कहा कि मुकदमेबाजी में लंबा समय लगता है।
इस मौके पर परिवहन सचिव संजीव गुप्ता, महाधिवक्ता श्रवण डोगरा, उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के एस बंयाल, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल राजीव भारद्वाज, रजिस्ट्रार अरविंद मल्होत्रा, वीरेंद्र शर्मा, आर के चौधरी व कमल किशोर सूद, विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव यशवंत सिंह चोगल और न्यायिक अकादमी के निदेशक राकेश कैंथला भी उपस्थित थे।