फॉरेस्ट गार्ड की मौत के मामले में हाईकोर्ट में सीबीआई ने दिया अजीबोगरीब तर्क
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में होशियार सिंह फॉरेस्ट गार्ड की मौत और इससे जुड़े अवैध वन कटान के मामलों में सीबीआई ने स्टेटस रिपोर्ट पेश की।
कोर्ट ने इस रिपोर्ट को देखने के बाद इसे सीबीआई को लौटाते हुए कहा कि सीबीआई कोर्ट के पिछले आदेश के अनुसार स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में दायर करें।
सीबीआई ने अदालत को बताया कि इस मामले में कोर्ट के आदेशानुसार तीन प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं और जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है।
सीबीआई ने कहा है कि इस मामले में गठित एसआईटी में तीन डीएसपी रैंक के अधिकारियों को शामिल नहीं किया जा सका है, क्योंकि उनके पास स्टाफ की कमी है। शिमला में केवल एक ही डीएसपी रैंक का अधिकारी है।
कोर्ट ने सीबीआई को उचित आवेदन के माध्यम से एसआईटी में बदलाव करने के लिए आवेदन दायर करने को कहा। ज्ञात रहे कि गत 13 सितंबर को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए थे।
कोर्ट ने सीबीआई को इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन करने के निर्देश दिए थे कि इसमें एसपी और डीएसपी रैंक के तीन अधिकारी शामिल हों। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिए थे कि वह मामले की जांच में सीबीआई की हरसंभव सहायता करे। सीआईडी ने मामले में जो भी सबूत इकट्ठे किए हैं, उन्हें सीबीआई को सौंप दे।
9 जून को होशियार सिंह का शव गुरजब जंगल में पेड़ पर उल्टा लटका हुआ मिला था। हाईकोर्ट की ओर से इस मामले में संज्ञान लेने के बाद इस मामले में नियुक्त एमिक्स क्यूरी एलएस मेहता ने एसआईटी और पुलिसिया जांच पर कई गंभीर सवाल उठाए थे।
एमिक्स क्यूरी ने जांच पर उठाए कई सवाल
हाईकोर्ट में पेश सुझावों में एमिक्स क्यूरी ने जांच पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि होशियार सिंह की ओर से कथित तौर पर खाया गया जहर कहां से आया, किसने बेचा और किसने खरीदा? यह जांच के विषय में नहीं जोड़ा गया।
होशियार सिंह ने 5 जून को सुबह करीब पौने नौ बजे एक टीजीटी शिक्षक के घर दाल चावल, सलाद और आलू मटर खाए थे, जबकि 10 तारीख को पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी होशियार सिंह के पेट में यही पदार्थ पाए गए। डॉक्टरों की राय में खाना चार से छह घंटों में पच जाता है। अगर जहर खाया हो तो यह प्रक्रिया कुछ और देरी से पूरी होती है।
एमिक्स क्यूरी के अनुसार होशियार सिंह की मौत के समय की पुख्ता जानकारी जरूरी है, क्योंकि इससे मौत की असल वजह जानने में बहुत हद तक मदद मिलेगी।
5 से 9 जून के बीच घटनास्थल पर बारिश हुई या नहीं इस बारे में भी जांच नहीं की गई, क्योंकि इसका सीधा संबंध उलटियों के धुलने से हो सकता है। वन माफियाओं पर अभी तक कोई कड़ी कार्रवाई नहीं हुई और न ही कोई बड़ी गिरफ्तारी हुई, जिससे इस मौत की असल वजह का पता चल सके।
आईजी, एसपी समेत 9 पुलिस वालों के खिलाफ चालान जल्द
बहुचर्चित गुड़िया प्रकरण के तहत लॉकअप मौत मामले में सीबीआई जल्द ही आईजी और एसपी समेत नौ पुलिस वालों के खिलाफ अदालत में चालान पेश करने वाली है। चालान एक हफ्ते के भीतर पेश किया जा सकता है।
सीबीआई ने प्रदेश गृह विभाग को पत्र भेजकर पूछा है कि पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों के लिए अभियोजन मंजूरी के नियमों में क्या प्रावधान हैं।
जांच एजेंसी के अभियोजन मंजूरी के नियमों का ब्योरा मांगने से साफ है कि जल्द ही आरोपी पुलिस वालों पर कानूनी शिकंजा कसने वाला है।
चालान पेश करने से पहले आरोपियों के खिलाफ अभियोजन चलाने की मंजूरी ली जानी है। मामले में एक आईपीएस, दो एचपीएस सहित अन्य 6 जूनियर अफसर और कर्मचारी जेल में न्यायिक हिरासत में बंद हैं।
सीबीआई ने गृह विभाग से पूछे अभियोजन मंजूरी के प्रावधान
कोटखाई थाने में पुलिस हिरासत में एक आरोपी सूरज की हत्या के आरोप में सीबीआई ने आईजी जहूर एच जैदी समेत 9 पुलिस वालों को गिरफ्तार किया है। इसमें डीडब्ल्यू नेगी और मनोज जोशी एचपीएस अधिकारी हैं जबकि अन्य 6 कर्मी सब इंस्पेक्टर, हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल रैंक के हैं।
आईपीएस अधिकारी के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए राज्य स्तर से अनुमति नहीं लेनी होती, इसकी प्रक्रिया अलग है। प्रदेश सेवाओं के तहत आने वाले पुलिस कर्मियों के लिए राज्य सरकार से मंजूरी लेने के अलग-अलग प्रावधान बताए जा रहे हैं।
इसी संदर्भ में सीबीआई ने गृह विभाग को पत्र भेजकर अभियोजन मंजूरी के नियमों की जानकारी मांगी है। विभाग को पदवार मंजूरी प्रावधान देने हैं। गृह विभाग से मिलने वाली जानकारी के बाद ही सीबीआई अभियोजन चलाने की मंजूरी के लिए पत्राचार कर सकती है।