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प्रदेश में भांग की खेती को लीगल करने वाली पॉलिसी पर फंसा पेच

Mon, 02 Dec 2019 11:12 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 02 Dec 2019 11:12 AM IST
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himachal govt yet not decide for legalizing marijuana farming  in himachal pradesh
भांग की खेती - फोटो : pexels.com

ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट से पहले उत्तराखंड की तर्ज पर हिमाचल में भी भांग की खेती को कानूनी रूप देने की तैयारियों में जुटा आबकारी एवं कराधान विभाग इसे अब तक लागू नहीं करा सका है। आबकारी विभाग की इस नीति पर विधि विभाग ने कुछ बिंदुओं पर आपत्ति जताई है। आपत्तियां दूर करने के लिए विभाग को फाइल लौटा दी है। विभाग ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी से पहले इस नीति को शुरू करने के लिए आपत्तियों को दूर करने में जुटा है। आपत्तियां दूर होने के बाद विभाग इसे कैबिनेट में पेश करेगा। मंजूरी मिलने पर इसे लागू किया जाएगा। 

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जीवन रक्षक दवाओं और कुछ अन्य उपचारों के लिए भांग की खेती को कानूनी रूप देने के उद्देश्य से आबकारी विभाग ने एक नीति तैयार की है। इसके तहत भांग का इस्तेमाल हर हाल में सिर्फ निर्धारित उत्पादों के लिए किया जाए। इसके लिए सख्त प्रावधान किए जाएंगे। इन्वेस्टर्स मीट के लिए निमंत्रण बांटने के दौरान कई देशों के राजदूतों तथा विदेशी निवेशकों ने हिमाचल में पैदा होने वाली भांग की गुणवत्ता पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से चर्चा की थी।
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उन्होंने भांग के हिस्सों से कैंसर जैसी बीमारी के लिए बनने वाली दवाओं की बात कही थी। राजदूतों और निवेशकों की इन्हीं दलीलों के बीच सरकार ने भांग की खेती को कानूनी रूप देने पर मंथन शुरू किया। हाल ही में उत्तराखंड सरकार ने भांग की खेती को कुछ खास उत्पादों के निर्माण को कानूनी मंजूरी दी है। प्रदेश सरकार भी उसी तर्ज पर दवाओं के अलावा करीब 70 तरह के उत्पादों के निर्माण के लिए इस खेती को सरकारी नियंत्रण में कराना चाह रही है।
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पहले कोशिश थी कि नवंबर में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट से पहले मंत्रिमंडल की बैठक में इसे पेश किया जाए। अब विधि विभाग की आपत्तियां दूर कर ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी से पहले इसे जमीन पर उतारने की कोशिश की जा रही है। प्रमुख सचिव आबकारी संजय कुंडू ने कहा कि विधि विभाग ने कुछ आपत्तियां लगाकर भेजी थीं, जिन्हें दूर कर दोबारा फाइल जल्द विधि विभाग को भेजी जाएगी।

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