भूमि हस्तांतरण कानून में होगा संशोधन, विधेयक ला सकती है सरकार
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जनजातीय क्षेत्रों में लोगों को राष्ट्रीयकृत बैंकों से लोन की सुविधा दिलाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। सरकार हिमाचल प्रदेश भूमि हस्तांतरण कानून में संशोधन की तैयारी कर रही है। सूत्रों की मानें तो जनजातीय विकास विभाग ने राजस्व विभाग के साथ मिलकर इस पर काम शुरू कर दिया है।
सब कुछ ठीक रहा तो प्रदेश सरकार इस कानून के संशोधन विधेयक को 23 अगस्त से शुरू हो रहे विधानसभा मानसून सत्र में ला सकती है। अभी तक जनजातीय क्षेत्र लाहौल स्पीति, किन्नौर और चंबा के भरमौर और पांगी में राष्ट्रीयकृत बैंक कृषि को छोड़कर किसी भी अन्य तरह के लोन नहीं दे पाते।
कारण यह है कि हिमाचल प्रदेश भूमि हस्तांतरण कानून के सेक्शन 3(1) में लगाए गए प्रतिबंध की वजह से बैंकों के हाथ बंधे हैं। ऐसे में लोगों को जरूरत होने के बावजूद सिर्फ राज्य सहकारी बैंक से ही लोन लेना पड़ता है।
अब भी फंसा है पेच
बैंकों की इसी परेशानी को देखते हुए राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) ने सरकार को कानून में संशोधन के लिए पत्र लिखा था। प्रधान सचिव जनजातीय विकास ओंकार शर्मा ने बताया कि समिति के पत्राचार के बाद कानून में संशोधन के लिए विभिन्न पहलुओं पर विचार चल रहा है। संशोधन विधेयक को विधानसभा में पारित कराने के बाद राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
एसएलबीसी के संयोजक व यूको बैंक के महाप्रबंधक विवेक कौल ने बताया कि कानून की वजह से अभी तक बैंक जनजातीय क्षेत्र में लोन नहीं दे पा रहे। जनजातीय क्षेत्र में किसी गैर जनजातीय व्यक्ति को संपत्ति हस्तांतरित नहीं हो सकती।
जबकि बैंक लोन न चुकाने की सूरत में संपत्ति को ऑनलाइन नीलाम करते हैं। चूंकि नीलामी में देशभर से लोग हिस्सा लेते हैं ऐसे में कानून में अगर उचित संशोधन न हुआ तो भी बैंकों को लोन देने में हिचक रहेगी।