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बीबीएमबी का पैसा न मिलने पर फिर सुप्रीम कोर्ट जाएगा हिमाचल

Wed, 11 Jul 2018 12:17 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 11 Jul 2018 12:17 PM IST
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Himachal govt to file case in supreme court for recovery of BBMB

भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) की बिजली परियोजनाओं में पंजाब से अपने हिस्से का 2900 करोड़ बकाया नहीं मिलने पर हिमाचल सरकार अब फिर सुप्रीम कोर्ट जा रही है। कोर्ट के आदेशों के बावजूद यह राशि न दिए जाने पर प्रदेश सरकार अवमानना का केस करने की तैयारी कर रही है।

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ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट से हिमाचल के पक्ष में फैसला आने के बावजूद प्रदेश को उसका हक नहीं मिल रहा है। कई बार मसला उठाए जाने के बावजूद मामला फाइलों में ही सिमट कर रह गया है। पंजाब सरकार बीबीएमबी के हिस्से का न पैसा दे रहा है और न ही बिजली।
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हिमाचल के पास अब अवमानना का केस करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। हिमाचल ने बीबीएमबी में हिस्से को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी है। फैसला हिमाचल के पक्ष में आया है। कोर्ट के फैसले के समय पंजाब पर 4249 करोड़ का बकाया बनता था लेकिन दोनों राज्यों के बीच सहमति बनीं कि हिमाचल को पंजाब 2900 करोड़ रुपये दे देगा।

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पंजाब ने किया इनकार

Himachal govt to file case in supreme court for recovery of BBMB

इतनी राशि चुकाने में असमर्थता जताते हुए पंजाब ने ऑफर दिया था कि इस बकाये की वसूली अगर हिमाचल चाहे तो अगले 20 साल तक बीबीएमबी के प्रोजेक्टों में पंजाब के हिस्से की बिजली बेचकर कर सकता है।

हिमाचल सरकार ने पंजाब के इस ऑफर को इसी साल जनवरी में हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूर करते हुए 20 साल की जगह 10 साल में वसूली करने पर सहमति जताई थी।

दस साल के भीतर 13066 मिलियन यूनिट बिजली बेचकर अपना बकाया वसूलने का फैसला हुआ। कैबिनेट के फैसले से हिमाचल सरकार ने पंजाब को भी अवगत करवाया। पहले तो पंजाब इस फैसले को मानने को तैयार हो गया था, लेकिन अब इस बाबत हाथ खींच लिए हैं।

बीते दिनों शिमला में हुई देश के ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में इस मामले को लेकर कोई फैसला नहीं हो सका। ऐसे में अब हिमाचल सरकार ने इस मामले को दोबारा सुप्रीम कोर्ट ले जाने की तैयारी की है।

यह है पूरा मामला

Himachal govt to file case in supreme court for recovery of BBMB

पुनर्गठन के दौरान पंजाब के कुछ क्षेत्र हिमाचल में शामिल हो गए थे। पुनर्गठन से पूर्व बीबीएमबी प्रोजेक्टों  में पहले हिमाचल का महज 2.50 प्रतिशत ही हिस्सा था। पंजाब री-ऑर्गेनाइजेशन एक्ट 1966 के तहत हिमाचल में आने वाले बीबीएमबी प्रोजेक्टों में सूबे का 7.19 प्रतिशत हिस्सा बना।

इसके लिए प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट गई। वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल के दावे को सही ठहराते हुए 7.19 प्रतिशत हिस्सा देने के आदेश दिए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हिमाचल सरकार ने 7.19 प्रतिशत हिस्से के हिसाब से 4249 करोड़ एरियर का दावा किया था। 

हिमाचल झेल रहा विस्थापन का दर्द- बीबीएमबी के तहत सतलुज पर भाखड़ा और ब्यास नदी पर पौंग बांध बनने से सबसे ज्यादा विस्थापन का दंश हिमाचल के लोगों ने झेला। अब भी लोग मुआवजे की लड़ाई लड़ रहे हैं। जबकि हिमाचल की नदियों के पानी और बिजली का फायदा चार राज्य पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली उठा रहे हैं।

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