13 हजार शिक्षकों के नियमितीकरण पर उलझी सरकार, उठाया ये कदम
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नियुक्त 13 हजार से अधिक शिक्षकों के नियमितीकरण को लेकर जयराम सरकार उलझ गई है। पैट, पैरा और पीटीए शिक्षकों के मामले को लेकर सरकार ने विधि विभाग से राय मांगी है। बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में मुख्य याचिकाकर्ता पंकज कुमार ने केस वापस ले लिया है।
अब शिक्षकों के नियमितीकरण के लिए शिक्षा विभाग मंथन करने में जुटा हुआ है। विधि विभाग को फाइल भेजकर शिक्षा विभाग से पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट में अस्थायी शिक्षकों से जुड़ी एक याचिका को मुख्य याचिकाकर्ता ने वापस ले लिया गया है। इसे कोर्ट ने स्वीकार भी कर लिया है।
ऐसे में विभाग इस पर आगामी क्या कार्यवाही करे। शिक्षा विभाग ने पूछा है कि अधिकांश शिक्षक नियमित होने के लिए न्यूनतम पात्रता को पूरा करते हैं। ऐसे में क्या इन शिक्षकों को नियमित किया जाए? महकमे ने इसे लेकर अन्य मामले लंबित होने की जानकारी भी विधि विभाग को दी है।
बता दें कि अस्थायी शिक्षकों का यह मामला साल 2015 से सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्रार बेंच में चला हुआ था। नवंबर में इसे डबल बैंच के लिए शिफ्ट किया गया। 5 जनवरी से इस मामले की सुनवाई शुरू हुई। राज्य के हजारों शिक्षकों का भविष्य इस मामले से जुड़ा हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट से पंकज कुमार ने वापस ले लिया है केस
अगर सुप्रीम कोर्ट में यह केस वापस हो जाता है तो प्रदेश के हजारों अस्थायी शिक्षकों को लाभ होगा। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में साढ़े 13 हजार शिक्षक अस्थायी तौर पर तैनात हैं। याचिकाकर्ता पंकज कुमार ने साल 2013 में इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
आरोप लगाया था कि इस दौरान चहेतों को नौकरी दी गई है जबकि पात्र शिक्षक बाहर कर दिए गए। हिमाचल हाईकोर्ट ने 2014 में अस्थायी शिक्षकों के हक में फैसला सुनाया था। सरकार ने इसके बाद इनके लिए पॉलिसी तैयार कर दी थी।
प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद ही हजारों पीटीए शिक्षकों को अनुबंध पर लाया गया। इसी दौरान हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीमकोर्ट ने राज्य हाईकोर्ट के आदेशों पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी किए। इसके बाद से यह मामला सुप्रीमकोर्ट में विचाराधीन है।