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हिमाचल सरकार बोली- कौशल विकास भत्ते का ब्योरा देने में लगेगा छह माह का वक्त

Thu, 10 Jan 2019 10:58 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Thu, 10 Jan 2019 10:58 AM IST
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himachal govt: It will take six months to give details of skill development allowance

प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल के युवा बेरोजगारों को मिलने वाले कौशल विकास भत्ते में घोटाले की आशंका जताते हुए प्रदेश सरकार से उन सभी संस्थानों का ब्योरा मांगा है जो इस भत्ते को प्रशिक्षुओं में आवंटित करते हैं।

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कौशल विकास भत्ते में घोटाले की जांच से जुड़े मामले की सुनवाई 25 मार्च के लिए टल गई है। मामले की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि पुलिस व प्रशासन की ओर से कुछ सूचनाएं मिली हैं जबकि अन्य जिलों से सूचनाएं एकत्रित करने के लिए 6 सप्ताह का अतिरिक्त समय लगेगा।
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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने पुलिस व प्रशासन की अलग-अलग जांच रिपोर्टों को कोर्ट के समक्ष रखने के आदेश भी दिए। कोर्ट ने उन सभी शिक्षण अथवा ट्रेनिंग संस्थानों का ब्यौरा भी मांगा है, जिन्हें राज्य सरकार हर महीने 1000 रुपये प्रति प्रशिक्षु कौशल भत्ता
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जारी करती है। कोर्ट के समक्ष आए एक मामले के अनुसार सिरमौर जिला के संगड़ाह में पंजीकृत डीआईसीई एजूकेशन सोसायटी को कौशल विकास भत्ते में गड़बड़ी की आशंका के मद्देनजर रोजगार अधिकारी ने 6 अप्रैल 2018 को आदेश जारी कर ब्लैक लिस्ट कर दिया था। 

आदेश को निरस्त करने की मांग की

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सोसायटी ने अपने ऊपर लगाए आरोपों को निराधार बताते हुए इस आदेश को निरस्त करने की मांग की है। प्रार्थी सोसायटी के अनुसार वह वर्ष 2016 से बेरोजगार युवाओं को संगड़ाह, हरिपुरधार व शिलाई में अपने संस्थानों के माध्यम से आईटी व नॉन आईटी ट्रेड में प्रशिक्षण दे रहे हैं।

प्रशिक्षण सत्र 2017-18 में उनके संस्थानों में 221 दाखिले हुए। प्रार्थी के अनुसार अचानक सोसायटी के चेयरमैन कुलदीप सिंह के खाते में बेरोजगारी भत्ते वाली राशि गलती से आनी शुरू हो गई।

इस वर्ष मार्च महीने में इसकी शिकायत उसने संबंधित अधिकारियों सहित पुलिस में की। अप्रैल में रोजगार कार्यालय ने उसे 35,000 रुपये की राशि लौटाने व सोसायटी को ब्लैक लिस्ट करने के आदेश जारी कर दिए। हालांकि सोसायटी के चेयरमैन ने इस राशि को वापस भी कर दिया लेकिन इसे ब्लैक लिस्ट कैटेगिरी

से नहीं हटाया गया। कोर्ट ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान प्रथम दृष्टया पाया कि इस तरह के कथित घोटाले प्रदेश के अन्य स्थानों में भी हुए या हो रहे होंगे। कोर्ट ने आशंका जताई है कि हो सकता है कौशल विकास भत्ते का लाभ पात्र बेरोजगार प्रशिक्षुओं को न मिल रहा हो।

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