पुरानी नीति से नया औद्योगिक निवेश चाहती है प्रदेश सरकार
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सरकार चौदह साल पुरानी औद्योगिक नीति से नए औद्योगिक निवेश चाहती है। प्रदेश की वर्ष 2004 की औद्योगिक नीति से कैसे नए बड़े उद्योग आकर्षित होंगे? केंद्र सरकार जो वित्तीय लाभ उद्योगों को दे रही है, वह भी हिमाचल सरकार उद्योगों को देने में आनाकानी कर रही है। सरकार पुरानी नीति के तहत उद्योगों को लाभ दे रही है, लेकिन इससे उद्योगपतियों को सही मायने में वित्तीय लाभ नहीं मिल रहे हैं।
सरकार ने वर्तमान में जो औद्योगिक नीति लागू की है, उससे हिमाचल के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में लगे उद्योगों को पूरा लाभ नहीं मिला है। औद्योगिक नीति में स्पष्ट किया है कि राज्य में लगे उद्योगों को लाभ तभी मिलेगा, जब हिमाचलियों को 80 फीसदी रोजगार दिया हो। वर्तमान में राज्य में लगे उद्योगों को चाहते हुए भी अस्सी फीसदी हिमाचली नहीं मिल पा रहे हैं।
सीआईआई की बैठकों में उठता रहा है रोजगार का मुद्दा
सीआईआई की बैठकों में हर बार यह मसला उद्योगपति उठाते रहे हैं कि राज्य में लगे उद्योगों की जरूरत के अनुसार रोजगार देने के लिए हिमाचली युवा नहीं मिल रहे हैं। सीआईआई के राज्य अध्यक्ष आईएमजेएस सिद्धू कहते हैं कि उद्योगों में जो हिमाचली नियुक्त भी किए जाते हैं, वे नौकरी ज्वाइन नहीं करते। जो नौकरी ज्वाइन करते हैं तो वह टिक जाते हैं। यही कारण है कि उद्योगपति हिमाचलियों को उपयुक्त संख्या में रोजगार नहीं दे पाते।
केंद्र सरकार बिना शर्त दे रही है भाड़ा अनुदान
केंद्र सरकार हिमाचल में लगे उद्योगों को कच्चा माल लाने और तैयार माल दूसरे राज्यों में पहुंचाने को भाड़ा अनुदान देती रही है। राज्य सरकार ने औद्योगिक नीति की धारा 4.1 सी में भाड़ा अनुदान देने में उद्योगों के रास्तों में बाधा पैदा कर दी है।
सरकार की औद्योगिक नीति में स्पष्ट है कि जब तक 80 फीसदी रोजगार हिमाचलियों को नहीं देंगे, तब तक भाड़ा अनुदान जैसे वित्तीय लाभ नहीं दिए जाएंगे। ऐसी स्थिति में उद्योगों पिछले कई साल से भाड़ा अनुदान से वंचित रहना पड़ा है।