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सरकार पालतू पशुओं को लावारिस होने से बचाने में नाकाम: हाईकोर्ट

Sat, 24 Aug 2019 10:29 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 24 Aug 2019 10:29 AM IST
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himachal govt fails to save Domestic animals from becoming unclaimed: High Court

हाईकोर्ट ने पालतू पशुओं को लावारिस होने से बचाने और उन्हें लावारिस छोड़ने वालों पर कार्रवाई न करने पर सरकार और पंचायती राज संस्थाओं को जिम्मेदार ठहराया है।

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कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते कहा कि गांवों, सड़कों और गलियों में घूमने वाले लावारिस जानवर संभवतया स्थानीय लोगों ने नहीं, बल्कि बाहर से तस्करी और अन्य तरीकों से लाकर यहां छोड़े जाते हैं। कोर्ट के आदेशों के बावजूद सरकार और पंचायती राज संस्थाएं इस पर कार्रवाई नहीं कर पा रहीं।
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ऐसे लोगों को संबंधित अधिकारियों और सरकारी विभागों के ढुलमुल रवैये के कारण कानून का कोई डर नहीं है। लावारिस जानवर एक ओर भोजन और पानी के अभाव में जीने को मजबूर हैं। दूसरी ओर ये जानवर ग्रामीणों की फसलें बरबाद कर रहे हैं।

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सरकार ने शपथपत्र से अदालत को बताया था कि लावारिस पशुओं के लिए हिमाचल गोवंश संरक्षण और संवर्द्धन अधिनियम 2018 बनाया है। इसमें हर जिले में पशु अभ्यारण्य स्थापित किए जाएंगे। जहां पर लावारिस पशु खासकर गाय को सुरक्षित रखा जाएगा।

अदालत को बताया था कि अधिनियम के अनुसार सिरमौर, सोलन, ऊना, और हमीरपुर में पशु अभ्यारण्य बनाए जाने को राशि भी जारी कर दी है और अन्य जिलों में भूमि तलाशने को कदम उठाए जा रहे हैं।

जनहित याचिका की सुनवाई के बाद न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी और न्यायाधीश ज्योत्सना रेवाल दुआ की खंडपीठ ने सरकार के मुख्य सचिव को आदेश दिए थे कि वह शपथ पत्र से अदालत को बताएं कि सिरमौर, सोलन, ऊना, और हमीरपुर में पशु अभ्यारण्य बनाए जाने के बारे में कितनी प्रोग्रेस हुई और कितनी राशि खर्च की जा चुकी है।

इसके बाद सरकार ने शपथ पत्र दायर किया, जिसे कोर्ट ने अधूरा पाते हुए मामले के पक्षकारों को जरूरी सुझाव अदालत के समक्ष रखने को कहा, ताकि इस समस्या से निजात दिलाने के लिए ठोस कार्रवाई हो। मामले पर सुनवाई 26 सितंबर को होगी।

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