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सांसद के घर के बाहर जुटे सैकड़ों कर्मचारी, उपवास रख पेंशन बहाली की मांग

Sun, 28 Oct 2018 05:47 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोलन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोलन Updated Sun, 28 Oct 2018 05:47 PM IST
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himachal govt employees protest in solan for Old Pension Scheme

एनपीएस कर्मचारी महासंघ ने पुरानी पेंशन नीति को बहाल करने की मांग को लेकर सांसद वीरेंद्र कश्यप के घर के समीप उपवास कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें शिमला संसदीय क्षेत्र के जिला शिमला, सोलन और सिरमौर के दूरदराज क्षेत्रों से करीब 250 एनपीएस कर्मचारियों ने भाग लिया। इस दौरान सभी ने एनपीएस को किसी हाल में समाप्त करने का संकल्प लिया।

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इस मौके पर एनपीएस कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों ने सांसद को एक मांग पत्र भी सौंपा। इसके बाद सांसद ने एनपीएस कर्मचारी महासंघ को आश्वासन दिया कि वे इस मांग को संसद के आगामी सत्र में उठाएंगे और इस बारे में प्रधानमंत्री सहित वित्त मंत्री के साथ चर्चा की जाएगी। कर्मचारियों की मांग को प्रमुखता से रखा जाएगा। जिला एनपीएस अध्यक्ष श्याम लाल गौतम ने बताया कि हिमाचल में सरकार के अपने एनपीएस कर्मचारियों को वह लाभ तक नहीं दिए हैं।
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जो केंद्र सरकार ने 2009 में प्रदान कर दिए थे। इनमें कर्मचारी की सेवाकाल के दौरान मृत्यु या अक्षमता पर सीसीएस पेंशन नियम 1972 के तहत पेंशन प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि यह मुहिम पुरानी पेंशन बहाली पर ही पूरी होनी और अगला पड़ाव 26 नवंबर को दिल्ली में संसद का घेराव है। इस मौके पर जिलों के एनपीएस महासचिव दीपक ओझा, एनपीएस कार्यकर्ता देशराज ने सभी मौजूद सदस्यों को संबोधित किया।  
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यह है एनपीएस की व्यवस्था 
एनपीएस एक ऐसी व्यवस्था है जो 15 मई 2003 के बाद नियुक्त व नियमित हुए कर्मचारियों पर राज्य सरकार थोपी। इसमें कर्मचारी के सेवाकाल के दौरान कर्मचारी के वेतन में 10 प्रतिशत भाग कटता है और उतना ही भाग सरकार भी जमा करती है। इसके बाद इस राशि को एनएसडीएल की निजी संस्था शेयर बाजार जैसी संस्थाओं में लगाती है।

रिटायरमेंट के बाद इस एकत्रित राशि का 60 प्रतिशत भाग कर्मचारी को मिलता है और 40 प्रतिशत भाग कुछ चुनी हुई निजी कंपनियों के पास दिया जाता है। उसमें से कर्मचारी को कुछ चुने हुए प्लानों के हिसाब से पेंशन लग जाती है। डर इस बात का है कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण एनएसडीएल के पास जमा पैसे पर भरोसा करना बहुत मुश्किल है। सरकार की इस एनपीएस ने कर्मचारी को एक जुआरी बना दिया है। बड़ी बात यह है कि यह पेंशन राशि एक बार निश्चित हो गई। वही सारी उम्र तक रहती है। पुरानी पेंशन की तरह इसमें किसी तरह की बढ़ोत्तरी नहीं होती है।  

हिमाचल प्रेश में कर्मचारी 58 वर्ष में रिटायर होते है पर एनपीएस के तहत पेंशन 60 साल के बाद लग रही है। ऐसे उदाहरण सामने आ रहे है जिनमें 500 से 2000 रुपये तक की पेंशन लग रही है। यह उस कर्मचारी के साथ अन्याय है जो 30 से 35 वर्षों तक सरकार की सेवा कर बुढ़ापे में दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो जाता है। 
 
इस मौके पर एनपीएस कर्मचारी महासंघ शिमला के नारायण हिमराट, सोलन के पंकज शुक्ला, कुमारसैन के श्याम ठाकुर, प्रवक्ता संघ सोलन से दर्शन शर्मा, अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ सोलन के राकेश शर्मा, एनपीएस कर्मचारी महासंघ राज्य उपाध्यक्ष कपिल राघव, बिलासपुर के प्रधानाचार्य की ओर से नरेंद्र शर्मा, आईपीएच कर्मचारी संघ अध्यक्ष एलडी चौहान, हिमाचल सरकारी अध्यापक संघ से सुरेश भारद्वाज, अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ सोलन के अध्यक्ष जेके ठाकुर, एनजीओ सीटी यूनिट सोलन से नरेंद्र ठाकुर, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से डॉ. बलदेव नेगी, एनपीएस कर्मचारी संघ शिमला अध्यक्ष देवेंद्र सिंह प्रेमी, राज्य उपाध्यक्ष नित्यानंद, सिरमौर अध्यक्ष सुनील तोमर, सोलन के देशराज भारद्वाज सहित 200 से अधिक कर्मचारी मौजूद रहे।   

20 साल सेवा देने के बाद भी नहीं लगी पेंशन     
इस मौके पर आईपीएच विभाग से सेवानिवृत्त 62 वर्षीय दुर्गा देवी जो चायल की रहने वाली है, इस उपवास कार्यक्रम में मौजूद रहीं। उन्होंने अपनी नम आंखों से मौजूद सांसद सहित अन्य कर्मचारी सदस्यों से कहा कि उन्होंने करीब 20 वर्ष से सरकारी विभाग में अपनी सेवाएं प्रदान की हैं। उन्हें अभी तक किसी भी प्रकार की पेंशन नहीं मिल रही है।


सेवानिवृत्ति होने के समय उन्हें दो लाख रुपये दिए गए थे, लेकिन वह पैसा उनके वेतन में से काटा जाता था जो उन्हें बाद में दिया गया। बताया कि बारिश के दौरान उनका मकान गिर गया था। इसमें वह सारा पैसा भी लग गया है। अब उनके बुढ़ापे में उनके पास कोई भी पैसा नहीं है। वह भी पुरानी पेंशन की बहाली के लिए चायल से सोलन इस उपवास कार्यक्रम में आई थीं। 

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