पतंजलि के उत्पादों से सरकार का मोह भंग, पीछे खींच लिए हाथ
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प्रदेश सरकार का पतंजलि के उत्पादों से मोह भंग हो गया है। सरकार ने डिपो में ये उत्पाद बेचने से अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। सरकार ने इसके पीछे तर्क दिया है कि कंपनी के उत्पाद महंगे हैं। ऐसे में इन्हें नहीं खरीदा जा सकता है।
हालांकि, सरकार ने अपने स्तर पर कंपनी से अधिकारियों से दाम घटाने की बात की, लेकिन कंपनी रेट घटाने को तैयार नहीं हुई। इसके चलते सरकार ने भी प्रोडक्ट लेने से मना कर दिया है।
हिमाचल में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार ने हिमाचल के साढ़े अठारह लाख उपभोक्ताओं को पतंजलि के उत्पाद उपलब्ध कराने का फैसला लिया था। इसमें उपभोक्ताओं को घी, तेल, साबुन, डिटर्जेंट पाउडर और अन्य रोजमर्रा की वस्तुएं उपलब्ध कराई जानी थीं।
बाजार मूल्य की अपेक्षा ये उत्पाद 2 से 3 रुपये तक सस्ते मिलने थे, लेकिन जब खाद्य आपूर्ति निगम ने पंतजलि से इन उत्पादों को लेकर बात की तो उन्होंने रेट कम करने से मना कर दिया।
पतंजलि दुकानों पर पड़ना था असर
सरकार की यह योजना अगर सिरे चढ़ जाती तो हिमाचल में सैकड़ों कई पंतजलि की दुकानों पर इसका खासा असर पड़ना था। लोगों ने इन दुकानों में जाने के बजाय डिपो से सस्ते दामों में पतंजलि के उत्पाद खरीदने थे।
हिमाचल के डिपो में अब पतंजलि के उत्पाद नहीं बेचे जाएंगे। कंपनी की ओर से उत्पादों के रेट कम न किए जाने पर यह फैसला लिया गया है। - किशन कूपर, खाद्य आपूर्ति मंत्री