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बीमार उद्योगों को राहत देने की नीति पर बैठाई विजिलेंस जांच बंद

Mon, 28 May 2018 12:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Mon, 28 May 2018 12:01 PM IST
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Himachal govt closed files of vigilance investigation of industry

वीरभद्र सरकार के कार्यकाल के अंत में पारित बीमार उद्योगों को राहत देने की विवादित नीति पर जयराम सरकार की बैठाई विजिलेंस जांच नहीं होगी। भाजपा ने कई उद्योगपतियों को लाभ देने की मंशा से नीति बनाने का आरोप लगाया। जांच आदेश करवाने की कई विभागीय अधिकारियों की पैरोकारी रही।

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अब विजिलेंस को जांच सौंपने से पहले विभाग ने क्लीन चिट दे दी है कि नीति के आधार पर किसी को वित्तीय लाभ नहीं दिया गया। वित्तीय लेने देने को आधार बनाकर फाइल बंद कर दी गई, लेकिन अब इस बात का खुलासा नहीं हो पाएगा कि किस दबाव में यह नीति बनी। ऐसे में जांच के आदेश सवालों के घेरे में आ गया है।
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जयराम सरकार के गठन के बाद पूर्व सरकार के निर्णयों को रिव्यू करने के फैसले के तहत मंत्रिमंडल ने बीमार उद्योगों को राहत देने की नीति की जांच करवाने का निर्णय लिया। मंत्रिमंडल यह जानता था कि नीति लागू नहीं हुई, जिससे किसी बीमार औद्योगिक इकाई को इससे वित्तीय लाभ नहीं मिला।
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ऐसे में वित्तीय लेनदेन से अधिक नीति लाने के पीछे के कारणों और अधिकारियों की जवाबदेही जयराम सरकार की मंशा रही। इसके लिए विजिलेंस को जांच एजेंसी के तौर पर चुना गया।

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आखिर तीन बार आई थी कैबिनेट में

Himachal govt closed files of vigilance investigation of industry

इसके बाद इस महीने जांच के आदेश पहुंचे तो अब जांच शुरू होने से पहले ही उसे रोकने का फरमान जारी हो गया है। उद्योग विभाग ने सरकार को नीति के आधार पर कोई राजस्व नुकसान नहीं होने की दलील दी है। नीति लागू करने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया में भी कोई खामियां नहीं मिली।

इस आधार पर विभाग ने स्पष्ट कर दिया कि विजिलेंस से जांच करवाने का औचित्य नहीं है। सूत्रों की मानें तो जिन अफसरों पर बीमार उद्योगों को राहत देने की नीति बनाने की जिम्मेदारी वीरभद्र सरकार ने दी, उनमें से कुछ वर्तमान सरकार में अहम पदों पर हैं।

बीमार औद्योगिक इकाइयों को कई तरह के बकाया टैक्स और अन्य राहत देने की नीति से वीरभद्र सरकार और अफसरशाही सहमत नहीं थे। तीन बार एजेंडा प्रस्ताव कैबिनेट में आया। प्रारंभिक प्रस्ताव में 2800 करोड़ का राजस्व भार पड़ना था, जिसका अफसरशाही ने विरोध किया।

उस दौरान उद्योग सचिव बदले जाने को इस नीति से जोड़कर देखा गया। आखिर कैबिनेट ने मंत्रियों की उपसमिति तक बनाई। नए उद्योग सचिव ने उपसमिति के सुझावों को आधार बनाकर नीति बनाई जो कैबिनेट से पारित हुई। उस समय यह चर्चा थी कि एक बड़ी लॉबी के दबाव में नीति लाई गई।

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