हिमाचल में नर्सिंग ट्रेनिंग के पैटर्न को बदलने की तैयारी
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हिमाचल सरकार नर्सिंग ट्रेनिंग के पैटर्न को बदलने जा रही है। सरकारी स्तर पर इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसके लिए प्रदेश सरकार केरल राज्य के ट्रेनिंग पैटर्न को भी गंभीरता से देख रही है। केरल को नर्सिंग ट्रेनिंग में अव्वल माना जाता है। देश के अलावा विदेशों में भी केरल मेडिकल चिकित्सा संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त नर्सों की भारी मांग है।
वर्तमान में हिमाचल में नर्सिंग कॉलेज से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद प्रशिक्षु नर्सों को मेडिकल कॉलेज में प्रैक्टिकल के लिए भेजा जाता है। इंजेक्शन, दवाओं, ब्लड प्रेशर और मरीजों की देखभाल आदि गतिविधियां सिखाई जाती हैं।
प्रदेश सरकार का मानना है कि आज के दौर में नर्सों को डॉक्टरों की तरह ट्रेंड किया जाएगा, ताकि पीड़ित किसी मरीज को अगर किसी कारण डॉक्टर अस्पताल में उपलब्ध न हो तो नर्सें मरीज का उपचार शुरू कर स्थिति को संभाल लें।
केरल में कैंपस से होती है नर्सों की सेलेक्शन
इसके लिए नर्सों को ट्रेनिंग देने के पैटर्न को मजबूत करने की आवश्यकता है। जमा दो मेडिकल के बाद बीएससी नर्सिंग कोर्स होता है। यह कोर्स चार साल का रहता है। इसके बाद बैच वाइज या फिर परीक्षा पास करने के बाद इनकी अस्पतालों में तैनाती होती है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव बीके अग्रवाल का कहना है कि हिमाचल में नर्सिंग ट्रेनिंग पैटर्न को मजबूत करने की आवश्यकता है। इस पर स्वास्थ्य विभाग गंभीरता से मंथन कर रहा है। सरकार का मानना है कि केरल का ट्रेनिंग अव्वल दर्ज का है। चार साल प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद कैंपस से ही नर्सों की सेलेक्शन होती है।