सरकार चाहे तो मिल सकता है चार गुणा जमीन का मुआवजा
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धर्मशाला से शिमला के लिए बन रहे फोरलेन से विस्थापित और प्रभावित होने वाले लोगों को एनएचएआई चार गुणा मुआवजा देने को तैयार है। इसके लिए प्रदेश सरकार की मंजूरी जरूरी है। हालांकि, चुनाव घोषणा पत्र में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने फैक्टर चार को लागू करने की बात कहीं थी, लेकिन चुनाव के बाद इस पर अभी तक फैसला नहीं लिया है।
इस कारण धर्मशाला से शिमला तक बनने वाले फोरलेन में विस्थापन का दंश झेलने वाले लोगों को केंद्र की ओर से दिए जा रहे चार गुणा मुआवजे का लाभ नहीं मिलेगा। धर्मशाला से शिमला तक बनने वाले फोरलेन में 5000 करोड़ से अधिक खर्च होंगे। निर्माण के लिए पूरे कार्य को पांच जोन में बांटा गया है। सबसे पहले धर्मशाला से ज्वालामुखी तक कार्य का टेंडर होगा।
घोषणापत्र में किया था वायदा
इसके बाद अगले 6 महीने में शेष टेंडर किए जाएंगे। एक जानकारी के अनुसार पांचों जोन में सैकड़ों परिवार बेघर होंगे। सैकड़ों को अपनी उपजाऊ जमीन से हाथ धोना पड़ेगा। प्रदेश के लोगों की डबल लेन या फोरलेन के लिए अधिकृत की जाने वाली जमीन पर फैक्टर 1 या फैक्टर 2 में से कौन सा फार्मूला लागू करना है।
इसका फैसला प्रदेश सरकार को करना होगा। प्रदेश में इस समय लगभग 70 राष्ट्रीय राजमार्ग व फोरलेन बनने प्रस्तावित हैं। प्रदेश के लोग चार गुणा मुआवजे के लिए कई बार संघर्ष कर चुके हैं। पिछली सरकार ने फोरलेन और डबल लेन के लिए 2 गुणा मुआवजे का प्रावधान किया था।
हालांकि पिछले विस चुनाव में घोषणापत्र में चार गुणा अधिकृत जमीन का मुआवजा देने का वायदा किया था। इन प्रोजेक्ट के लिए एनएचएआई चार गुणा अधिकृत भूमि पर मुआवजा देने को तैयार है। इसके लिए प्रदेश सरकार को निर्णय लेना होगा।
एनएचएआई के प्रोजेक्ट निदेशक वाईए राउत ने बताया कि एनएचएआई अधिकृत भूमि का दो से चार गुणा मुआवजा देती है। अगर राज्य सरकार चार गुणा मुआवजे की अधिसूचना जारी करती है तो वे चार गुणा देने को तैयार हैं।