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ISRO ने किया आगाह तो इस मुद्दे पर जागी सरकार, बनाया ये प्लान

Wed, 01 Aug 2018 11:01 AM IST
खेमराज शर्मा, अमर उजाला, बिलासपुर
खेमराज शर्मा, अमर उजाला, बिलासपुर Updated Wed, 01 Aug 2018 11:01 AM IST
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Himachal govt 4750 crore rupee plan to save glaciers from melting and to make check dams

हिमाचल में तेजी से पिघल रहे ग्लेशियरों को बचाने के लिए प्रदेश सरकार गंभीर हो गई है। इसके लिए सरकार ने ग्लेशियरों के नीचे चेक डैम बनाने की योजना तैयार की है। इसके अलावा बारिश के पानी का संग्रहण भी किया जाएगा ताकि पर्यावरण असंतुलन से भविष्य में होने वाले जल संकट से बचा जा सके।

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क्षेत्र में पर्यावरण के हिसाब से पौधरोपण भी होगा। इस योजना को मूर्तरूप देने के लिए हिमाचल ने केंद्र सरकार को 4750 करोड़ का प्रोजेक्ट भेजा है। आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्र ने हामी भर दी है। वित्त मंत्री अरुण जेटली और नितिन गडकरी ने भी इस प्रोजेक्ट में खासी रुचि दिखाई है।
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हिमालयन क्षेत्रों में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इसका असर पर्यावरण पर भी पड़ रहा है। आने वाले समय में जल संकट खड़ा होना लाजिमी है। राज्य सरकार इसे लेकर गंभीर है। इसके विकल्प तलाशे जा रहे हैं।
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प्रदेश सरकार ने केंद्र को 4750 करोड़ रुपये का एक प्रस्ताव भेजा है जो भविष्य में ग्लेशियरों के पिघलने की क्षति की भरपाई में कारगर सिद्ध होगा। योजना के तहत बारिश के पानी के संरक्षण के लिए कृत्रिम झीलें और अन्य स्रोत तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा ग्लेशियरों को पिघलने से रोकने के लिए चेक डैम बनाए जाएंगे।

हर साल सिकुड़ रहे ग्लेशियर

Himachal govt 4750 crore rupee plan to save glaciers from melting and to make check dams

इसरो के वैज्ञानिक दावा कर चुके हैं कि हिमालय के ग्लेशियर 1965 के बाद 4340 मीटर सिकुड़ चुके हैं। अभी भी हर साल सिकुड़ रहे हैं। ग्लेशियर छोटे-छोटे हिस्सों में बंट गए हैं, जिससे इसका 10 फीसदी हिस्सा ही गायब हो गया है।

वैज्ञानिकों का दावा है कि वैश्विक तापमान की तुलना में हिमालय में आठ गुना वृद्धि हुई है जो ग्लेशियरों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। 

जंगलों की आग भी कारण
हिमालयी जंगलों में आग की घटनाएं ग्लेशियरों के लिए नया खतरा है। आग के धुएं से ग्लेशियर के ऊपर जमी कच्ची बर्फ तेजी से पिघलने लगती है।

इसके दूरगामी प्रभाव पड़ते हैं। काला धुआं कार्बन के रूप में ग्लेशियरों पर जम जाता है, जो भविष्य में उस पर नई बर्फ को टिकने नहीं देता है।

बारिश के पानी का संग्रह करना लाभदायक होगा। चेक डैम बनाने से हिमखंडों का गिरना भी काफी हद तक रुक सकता है। क्षेत्र में पर्यावरण के हिसाब से पौधरोपण करना भी सार्थक सिद्ध होगा। अगर प्रदेश सरकार ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रही है तो यह पर्यावरण के लिए बेहतर होगा। - डॉ. जेसी कुनियाल, वरिष्ठ वैज्ञानिक, जीबी पंत राष्ट्रीय पर्यावरण एवं शोध संस्थान 

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