आलू उत्पादन घटना चिंतनीय, शोध पर जोर दें वैज्ञानिक: मिश्र
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राज्यपाल कलराज मिश्र ने आलू पर गहन वैज्ञानिक शोध पर जोर दिया है। गुरुवार को केंद्रीय आलू अनुसंधान केंद्र (सीपीआरआई) के 71वें स्थापना दिवस की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल ने कहा अधिक से अधिक किसानों को आलू की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
उन्होंने प्रदेश में आलू के घटते उत्पादन पर चिंता जताते हुए विज्ञानियों से शोध के माध्यम से इसका समाधान खोजने का आह्वान किया। राज्यपाल ने इस बात पर संतोष जताया कि राज्य में लगभग 14 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती की जा रही है।
आलू का कुल उत्पादन लगभग दो लाख टन है। हिमाचली आलू अपनी गुणवत्ता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है तथा इससे किसानों की आर्थिकी निरंतर सुदृढ़ हो रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल की जलवायु आलू की खेती करने के लिए अनुकूल है। राज्य के किसान लगभग पिछले 150 वर्षों से इसकी खेती कर रहे हैं।
आधुनिक तकनीक और अनुसंधान के कारण अब देश के अन्य भागों में भी आलू भारी मात्रा में उगाया जा रहा है, जिसका अधिकतम श्रेय सीपीआरआई को जाता है।
उन्होंने वैज्ञानिकों को बीमारी रहित आलू की कुफरी हिमालयनी, कुफरी गिरधारी और कुफरी करण जैसी किस्में व पर्यावरण मित्र विधि और कीटरोधक विधि जैसी तकनीकों को विकसित करने पर बधाई दी।
भारत का आलू उत्पादन में विश्व में दूसरा स्थान
उन्होंने कहा कि संस्थान लाभ देने वाली किस्मों के संरक्षण के लिए सराहनीय प्रयास कर रहा है और 20 पेटेंट हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ा है। राज्यपाल ने विशेष आलू उत्पाद क्षेत्रों की पहचान, आयात निर्यात क्षेत्रों की स्थापना, देश-विदेश में आलू के लिए बाजार खोजने और अन्य सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देकर उन्हें आपस में जोड़ने की दिशा में कार्य करने की सलाह दी। राज्यपाल ने संस्थान की वर्ष 2018-19 की वार्षिक रिपोर्ट भी जारी की और अपने-अपने क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए अधिकारियों को सम्मानित किया।
सांसद सुरेश कुमार कश्यप ने विज्ञानियों से आलू की अच्छी पैदावार वाली किस्मों का विकास करने का आग्रह किया। उन्होंने किसानों से अपनी कृषि आय को बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक शोध का भरपूर लाभ उठाने का भी आग्रह किया। इस अवसर पर महापौर कुसुम सदरेट, नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. परविंद्र कौशल, निदेशक डॉ. एसके चक्रवर्ती, डॉ. एनके पांडे सहित कई अन्य मौजूद रहे। राज्यपाल ने कहा कि चीन के बाद भारत आलू उत्पादन में विश्व में दूसरे स्थान पर है।
इसमें सीपीआरआई के शोध कार्य व आधुनिक तकनीकों के विकास की प्रमुख भूमिका है। भारतीय आलू को नई ऊंचाइयों तक ले जाने, उत्पादन में संतुलन बनाए रखने, आलू के उत्पाद को 8 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने, आलू के निर्यात को एक प्रतिशत से अधिक करने, उत्पाद के बाद के होने वाले नुकसान को 16 प्रतिशत तक घटाने जैसी चुनौतियों से निपटने की आवश्यकता है।