अमेरिका में गूंजेगी मंडी के देवताओं के साथ बजने वाली हिमाचल के सूरजमणि की शहनाई
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हिमाचली लोकगीतों में बहुत कम ऐसे गीत होंगे, जिन्हें मंडी के प्रसिद्ध शहनाईवादक सूरजमणि ने अपनी शहनाई की मधुर ध्वनि से नहीं पिरोया होगा। प्रदेश और देश में अपनी शहनाई का जादू दिखाने वाले इस कलाकार की शहनाई जल्द विदेशों में भी गूंजने वाली है।
इन्हें अमेरिका की एक संस्था ने अप्रैल में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम का निमंत्रण दिया है। उनका वीजा भी बन गया है। वह अप्रैल में वहां जाएंगे। बॉलीवुड फिल्म ‘पल-पल दिल के साथ’ के गीतों सहित वह चार हजार से अधिक लोकगीतों को शहनाई के सुरों में पिरो चुके हैं।
उन्हें शिवरात्रि, दशहरा, मिंजर, लवी मेले के मंचों ने अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। नौ साल की आयु में अपने पूर्वजों से शहनाई वादन के गुर सीखने वाले इस कलाकार ने शहनाई वादन का काम मंडी के देवी-देवताओं के साथ शुरू किया था।
मात्र तीसरी कक्षा तक शिक्षित
मात्र तीसरी कक्षा तक शिक्षित इस कलाकार की इस कला का जादू इस कदर बोला कि जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर के मेलों में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला।
सूरजमणि बताते हैं कि उनको अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव से सबसे अधिक पहचान मिली है। आज भी इस मेले की सांस्कृतिक संध्याओं का आगाज इनकी शहनाई से होता है।
मां और ताया से ली शिक्षा
सूरजमणि ने बताया कि इनकी माता मर्ची देवी अच्छी गायक थीं और बेहतरीन ढोलक बजाती थीं। इनके ताया गुजू राम संगीत कला के बहुत बड़े जानकार थे। माता और ताया से उन्हें शहनाई वादन की बहुत अधिक शिक्षा मिली है। देवी-देवताओं के साथ शहनाई बजाकर और दूर-दूर तक मंगलाचार सुनाकर उनकी शहनाई की कला में नया निखार आता रहा।
युवा आगे आएं तो सिखाने को तैयार
लोक कलाकार ने कहा कि आधुनिक दौर में शहनाई की कला लुप्त हो रही है। युवाओं में इस कला को सीखने की कोई रुचि नहीं दिख रही है। कई युवा कलाकार आधुनिकता भरे गीत और संगीत में डूब चुके हैं। इस कला से हर कोई मुंह फेर रहा है। उन्होंने इस पर चिंता जताई और युवा कलाकारों को इस कला को जीवंत रखने के लिए आगे आने को कहा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार उनकी कुछ मदद करे तो वह युवाओं को निशुल्क सिखाने को तैयार हैं।