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हिमाचल को जेटली के बजट से ऊर्जा कनेक्टिविटी और उद्योग क्षेत्र में आस

Thu, 01 Feb 2018 09:32 AM IST
अरुणेश पठानिया, अमर उजाला, शिमला
अरुणेश पठानिया, अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 01 Feb 2018 09:32 AM IST
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himachal expectations from union budget for power and industry

प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद केंद्रीय बजट से हिमाचल को खासी उम्मीदें हैं। जीएसटी लागू होने के बाद प्रदेश को होने वाले नुकसान की भरपाई से लेकर राज्य केंद्र में निहित कई तरह की शक्तियों में विशेष राहत चाहता है। प्रदेश की 50 मेगावाट तक की जलविद्युत परियोजनाओं के लिए अनिवार्य वन एवं पर्यावरण की अनापत्ति से छूट चाहिए।

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राज्य बिजली की बिक्री से होने वाली आय में सर्विस टैक्स से छूट भी चाहती है। विकास योजनाओं के आड़े आ रहे वन भूमि से संबंधित नियमों में कुछ रियायत की मांग केंद्र से की है। अभी तक सरकार केवल 1 हेक्टेयर तक की अनुमति खुद दे सकती है, जिसे 10 हेक्टेयर किए जाने का सुझाव केंद्रीय वित्त मंत्रालय को दिया है।
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सरकार ने प्रदेश में ढांचागत विकास के लिए बड़े एयरपोर्ट, नई रेललाइनों, हेली टैक्सी चलाने में मदद के साथ उद्योगों के लिए 100 प्रतिशत कर में छूट देने का प्रस्ताव भी दिया है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के वर्ष 2018-19 के बजट को लेकर राज्य सरकार ने 18 बिंदुओं पर मांग रखी है।

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मोदी सरकार से हिमाचल को यह मिला

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राज्य सरकार अपनी आर्थिकी को सुदृढ़ करने के लिए वन पर्यावरण के विकास योजनाओं पर पड़ने वाली कानूनी पेचीदगी का सरलीकरण चाहती है। इतना ही नहीं, जल विद्युत परियोजनाओं को लेकर भी राज्य सरकार केंद्र से विशेष रियायत चाहती है।

जीएसटी लागू होने से प्रभावी होने के बाद पहले से चल रहे औद्योगिक पैकेज के तहत जिन उपक्रमों को 2020 तक इनकम और केंद्रीय आबकारी शुल्क की छूट दी गई है, उनके लिए विशेष आर्थिक मदद मांगी गई है। इसी तरह से सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने के अलावा छोटे उद्योगों के लिए विशेष मदद की उम्मीद है।

हिमाचल को केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद वर्ष 2014 में आईआईएम का तोहफा मिला। इसी साल रेणुका बांध पर काम के लिए बजट जारी हुआ। लाहौल-स्पीति में बड़े सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट की योजना धरातल पर नहीं उतरी।

वर्ष 2015 में जेटली ने प्रदेश को एम्स देने की घोषणा की, जिसके लिए दिसंबर 2017 को 1351 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ। वर्ष 2016 के बजट में हिमाचल के लिए राष्ट्रीय रेल परियोजना मिली, लेकिन अभी उसका सर्वे होना है। इसके अलावा हमीरपुर ऊना रेललाइन पर स्वीकृति मिली। पिछले बजट में हिमाचल के हिस्से कोई बड़ी घोषणा नहीं आई।



























 

हिमाचल को यह है दरकार

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- राजधानी के एयरपोर्ट का बड़े विमानों लायक विस्तारीकरण, दो अन्य एयरपोर्ट के निर्माण का एलान
- ऊर्जा से होने वाली राज्य की आय को सर्विस टैक्स के दायरे से बाहर करना
- पठानकोट जोगिंद्रनगर रेललाइन को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करना
- ऋण और कर्ज की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए जल विद्युत को प्राथमिकता क्षेत्र में शामिल करना
- एमएसएमई सेक्टर को प्रोत्साहित करने के लिए बाजार से फंड जुटाने को कम ब्याज दरें
- औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए 100 प्रतिशत इनकम टैक्स में छूट, कैपिटल सब्सिडी का भी रहे प्रावधान
- कॉरपोरेट टैक्स को 18 प्रतिशत लाना और वैकल्पिक न्यूनतम कर को समाप्त करना
- औद्योगिक ढांचागत उन्नयन योजना के तहत हिमाचल को केंद्रीय मदद दरों में विशेष राहत
- पब्लिक सेक्टर उपक्रमों में हिमाचल को के लिए केंद्रीय संस्थान की घोषणा

विदेशी सेब पर आयात शुल्क बढ़ने की उम्मीद 

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हिमाचल के सेब बागबानों को केंद्रीय बजट से बड़ी राहत की आस है। विदेशों से आयात होने वाले सेब पर शुल्क बढ़ने से प्रदेश के सेब बागबानों को अच्छे दाम मिलेंगे। सरकार ने भी केंद्रीय वित्त मंत्रालय को विदेशी सेब पर आयात शुल्क दोगुना करने का प्रस्ताव दिया है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2016 में मंडी रैली में इसके संकेत दे गए थे, लेकिन पिछले बजट में केंद्र ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया। अब हिमाचल में भाजपा की सरकार बनने से सेब बागवानों को उम्मीद है कि लोकसभा चुनाव से पहले केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली आयात शुल्क बढ़ा सकते हैं।


हिमाचल में सेब का लगभग 35 सौ से चार हजार करोड़ का कारोबार है, लेकिन विदेशी सेब से मिल रही टक्कर से बागबानों को अच्छे दाम नहीं मिलते। विदेशी सेब को टक्कर देने के लिए बागबान लंबे अरसे से उन पर आयात शुल्क बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। सेब उत्पादकों इस संबंध में कई बार मांग कर चुके हैं।


 

कोल्ड ड्रिंक्स में नहीं डला सेब का जूस

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​प्रदेश में होने वाले फल उत्पादन का 85 प्रतिशत सेब है, ऐसे में अगर सेब उत्पादकों के आयात शुल्क में बढ़ोतरी बड़ी राहत दे सकती है। वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन के तहत हुए अन्य देशों से हुए करार के तहत शुल्क को बढ़ाना केंद्र के लिए आसान नहीं है।

मौजूदा समय में सेब के आयात पर 50 प्रतिशत शुल्क है, जिसे और बढ़ाने से केंद्र को सेब उत्पादक देशों का दबाव झेलना पड़ सकता है। राज्य सरकार की ओर से केंद्रीय वित्त मंत्रालय को भेजे सुझाव में सेब पर आयात शुल्क दो गुना बढ़ाया जाना चाहिए। 

विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिमला में हुई रैली के दौरान हिमाचल के फल उत्पादकों को कोल्ड ड्रिंक्स में फ्रूट जूस मिलाने की नीति लाने का वादा किया था। पीएम मोदी का दावा था कि कोल्ड ड्रिंक्स में फ्रूट जूस मिलाने का सबसे बड़ा फायदा सेब उत्पादकों को मिलेगा। पीएम के इस एलान के बावजूद हिमाचल के सेब उत्पादकों से कोल्ड ड्रिंक्स में जूस के लिए सेब की खरीद नहीं हुई। 

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