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संशोधन विधेयक के खिलाफ धरना देंगे बिजली कर्मचारी

Mon, 07 Jan 2019 04:59 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 07 Jan 2019 04:59 PM IST
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himachal electricity employees will protest against power amendment

बिजली कानून संशोधन विधेयक 2018 के खिलाफ मंगलवार को देश भर में बिजली कर्मचारी धरना देंगे। इस दौरान बिजली बोर्ड के मंडल, वृत्त और मुख्य अभियंता स्तर के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन होगा।

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स्टेट इलैक्ट्रिसिटी बोर्ड इंप्लाइज यूनियन के महासचिव हीरालाल वर्मा ने बताया कि शीत सत्र में पारित करने के लिए केंद्र सरकार संशोधन विधेयक ला रही है। संशोधन कानून के प्रभाव में आने से बिजली बोर्ड विघटित होकर सभी कार्यों को अलग-अलग करने के साथ वितरण के कार्य को छोटी-छोटी कंपनियों में बांटा जाना तय है।
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उन्होंने बताया कि प्रदेश की भूगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की लागत औद्योगिक क्षेत्र की तुलना में काफी ज्यादा है, जिसे अभी विद्युत दरें तय करते समय क्रॉस सब्सिडी को कम किया जा रहा है। 

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ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा

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इस कानून के पारित होने से दूरदराज क्षेत्रों में बिजली दरें आपूर्ति के हिसाब से तय होगी। ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। बिजली मापने के लिए जगह-जगह इलेक्ट्रानिक उपकरणों व बिजली के फीडरों को अलग-अलग करने का खर्च भी उपभोक्ताओं को वहन करना पड़ेगा।

उन्होंने बताया कि औद्योगिक और अन्य राजस्व वाले क्षेत्र निजी हाथों में चले जाएंगे। इसका सीधा असर प्रदेश के घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। जहां बड़े उपभोक्ताओं को उनकी सुविधा अनुसार बिजली मिलेगी।

अन्य उपभोक्ताओं की विद्युत आपूर्ति में दी जा रही सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित होंगी और विद्युत दरें बढ़ेंगी। यूनियन के महासचिव हीरालाल वर्मा ने बताया कि बोर्ड कर्मचारियों की अन्य मांगों को लेकर भी प्रदर्शन के दौरान उठाया जाएगा।

सचिवालय को घेरेंगी मजदूर यूनियनें

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केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर सीटू से संबंधित सभी यूनियनें मंगलवार और बुधवार को प्रदेश में हड़ताल करेंगी। मंगलवार को राज्य सचिवालय का घेराव किया जाएगा। बुधवार को शिमला स्थित सब्जी मंडी में जनसभा होगी।

सीटू के प्रदेश अध्यक्ष जगतराम ने बताया कि प्रदेश की सभी विद्युत परियोजनाओं, होटल वर्कर्स, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, आंगनबाड़ी, मिड डे मील, रेहड़ी फड़ी सहित विभिन्न विभागों में ठेकेदारी प्रथा में कार्य कर रहे कर्मचारी, आउटसोर्स कर्मचारी और उद्योगों में कार्यरत सभी कर्मचारी और यूनियनें हड़ताल में शामिल होंगी।

सीटू के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ हड़ताल की जा रही है। केंद्र की भाजपा सरकार मालिकों के पक्ष में श्रम कानूनों में बदलाव कर रही है। उन्होंने कहा कि महंगाई पर रोक लगाई जाए।

न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये किया जाए। श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी फेरबदल वापस लिए जाए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार पूंजीपतियों के लिए कार्य कर रही है। इस सरकार के कार्यकाल में मजदूरों का शोषण हुआ है। श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी परिवर्तन किए जा रहे हैं। इसके विरोध में देश भर में आठ और नौ जनवरी को हड़ताल की जाएगी।

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