हिमाचल चुनाव: हाथी ने पहाड़ पर दिया अंडा, हुए नोटा से भी बहुत बुरे हाल
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भाजपा और कांग्रेस के इर्द-गिर्द घूमने वाली हिमाचल की राजनीति में इस बार भी तीसरा राजनीतिक दल उभरकर सामने नहीं आया। भाजपा-कांग्रेस के बाद कभी यूपी की सत्ता पर प्रचंड बहुमत के साथ काबिज होने वाली बसपा हिमाचल में 2017 के विधानसभा चुनावों में नोटा (इनमें से कोई नहीं) से भी पिछड़ गई।
पार्टी की हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसके 51 प्रत्याशियों में अधिकतर की जमानत तक जब्त हो गई। विधानसभा चुनाव के दौरान बसपा को कुल 17 हजार 335 वोट मिले। 32 हजार 656 लोगों ने नोटा का इस्तेमाल किया।
यहां सबसे ज्यादा दबा नोटा
सूबे में सियासत करने वाले वालों से हिमाचल के लोग इस कद्र नाराज रहे कि लोकतंत्र के उत्सव में तो सहभाग किया, लेकिन चुनावों के दौरान 0.9 फीसदी ने अपने वोट को किसी को भी नहीं देने का फैसला लिया।
जाहिर है हिमाचल में नोटा इस्तेमाल कर तीसरे विकल्प को भी पिछाड़ने वाले लोगों ने नेताओं के लिए एक सबक सामने रख दिया है।
सबसे ज्यादा नोटा का इस्तेमाल जोगिंद्रनगर सीट पर किया गया। यहां 1002 लोगों ने, जबकि लाहौल-स्पीति में सबसे कम 70 मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया। देहरा में 903 और शाहपुर में 815 लोगों ने प्रत्याशियों से ज्यादा नोटा का इस्तेमाल किया।