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Shimla: हाईकोर्ट से मंडी सदर से आजाद उम्मीदवार लक्ष्मेंद्र को नहीं मिली राहत

Thu, 10 Nov 2022 07:38 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 10 Nov 2022 07:38 PM IST
सार

मंडी जिले के विधानसभा क्षेत्र सदर से आजाद उम्मीदवार लक्ष्मेंद्र को हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। याचिकाकर्ता ने भाजपा प्रत्याशी अनिल शर्मा के नामांकन को चुनौती दी थी। गुरुवार को सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता ने अदालत से अपनी याचिका वापस ले ली है। 

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himachal election 2022, Azad candidate from Mandi Sadar did not get relief from High Court
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के विधानसभा क्षेत्र सदर से आजाद उम्मीदवार लक्ष्मेंद्र को हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। याचिकाकर्ता ने भाजपा प्रत्याशी अनिल शर्मा के नामांकन को चुनौती दी थी। गुरुवार को सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता ने अदालत से अपनी याचिका वापस ले ली है। अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ता को सक्षम अथॉरिटी के पास चुनौती देने की छूट दी है। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिए।

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मामले पर सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने दलील दी कि किसी प्रत्याशी के नामांकन को सीधे हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती नहीं दी जा सकती। याचिकाकर्ता चुनाव समाप्त होने के बाद नियमानुसार चुनाव याचिका के माध्यम से चुनौती दे सकता है। इस समय चुनाव के लिए सिर्फ दो दिन बचे हैं। ऐसे में प्रत्याशी के नामांकन को चुनौती देना उचित नहीं है, जबकि याचिकाकर्ता के पास चुनौती देने के लिए पर्याप्त समय था।   याचिका में आरोप लगाया गया है कि अनिल शर्मा ने अपना नामांकन दायर करते समय झूठा शपथपत्र दायर किया है। करोड़ों रुपये की संपत्ति को इसमें नहीं दर्शाया गया है।
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दलील दी गई कि अनिल शर्मा ने अपनी पत्नी के नाम से शिमला के जाखू में 243 वर्ग मीटर का प्लॉट खरीदा है। इसकी कीमत करोड़ों में है, जिसकी जानकारी नामांकन दायर करते समय जानबूझ कर छिपाई गई। इस बारे में चुनाव आयोग को शिकायत की गई, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता के पास चुनाव याचिका के माध्यम से अनिल शर्मा के नामांकन को चुनौती देने का अधिकार है। चुनाव समाप्त होने के बाद वह नियमानुसार चुनौती दे सकता है। खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को अपनी याचिका वापस लेने के बाद यह छूट दी है। 

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