गद्दी समुदाय के लोगों का रोष मार्च, मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी
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ऊना में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की ओर से गद्दी समुदाय पर दिए कथित बयान और धर्मशाला में हुए लाठीचार्ज के खिलाफ गद्दी समुदाय के लोगों ने वीरवार को रोष रैली निकाली। उन्होंने सरकार को भंग कर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग उठाई।
साथ ही लाठीचार्ज में संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई मांगी। पूर्व मंत्री एवं गद्दी नेता किशन कपूर के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया। इसके बाद उपायुक्त के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजा गया।
एसपी कांगड़ा से भी कार्रवाई की मांग उठाई। किशन कपूर ने कहा कि मंडी में वनरक्षक की मौत, कोटखाई में गुड़िया प्रकरण, चंबा में दसवीं की छात्रा से दुराचार मामला और अब गद्दी समुदाय के लोगों पर लाठीचार्ज करवाना सरकार की विफलता को दर्शा रहा है। ऐसे प्रकरणों से सरकार की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है।
राज्यपाल को ज्ञापन, लाठीचार्ज के खिलाफ कार्रवाई मांगी
गद्दी समुदाय के लोगों ने एसपी और उपायुक्त कार्यालय का घेराव भी किया। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पूर्व मंत्री किशन कपूर ने बुधवार को मैकलोडगंज में हुए लाठीचार्ज के पीछे शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा का हाथ बताया।
कहा कि सीएम का काफिला चले जाने के बाद प्रदर्शनकारियों पर सुधीर शर्मा के इशारों पर लाठीचार्ज किया गया। इस दौरान शाहपुर की विधायक सरवीण चौधरी, मदन भरमौरी, वार्ड पार्षद ओंकार नैहरिया, जिप सदस्य गायत्री कपूर, पूर्व नप पार्षद कमला पटियाल,
भाजपा जिला अध्यक्ष संजय चौधरी, भाजपा एसटी मोर्चा के जिला अध्यक्ष रमेश जरियाल, विशाल नैहरिया, कार्निक पाधा और विपिन नैहरिया आदि मौजूद रहे।
बातचीत से चलता है लोकतंत्र, लाठी से नहीं: धूमल
गद्दी समुदाय के प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज को नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने निंदनीय बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से कहा कि लोकतंत्र बातचीत से चलता है न कि लाठी चलाने से।
सीएम को यह बात समझनी चाहिए। धर्मशाला में प्रेस वार्ता में धूमल ने कहा कि डल लेक के पास गद्दी समुदाय के लोग शांतिपूर्वक सीएम की टिप्पणी के प्रति विरोध जता रहे थे। प्रदर्शन करना तो लोकतांत्रिक अधिकार है।
मुख्यमंत्री को गाड़ी से उतरकर उनकी बात सुनकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इस घटना ने पुख्ता कर दिया है कि प्रदेश में अब कानून व्यवस्था नाम की चीज नहीं रह गई है। कहा कि मुख्यमंत्री कब किस समुदाय या व्यक्ति पर क्या टिप्पणी कर दें, इसका उन्हें स्वयं ही ज्ञान नहीं होता।
वे कभी अपनी ही पार्टी और विपक्ष को मकड़झंडू शब्द से पुकारते हैं। विस सत्र में कई बार विधायकों को बंधुआ मजदूर बताते हैं। क्या मुख्यमंत्री जैसे पद पर ऐसी भाषा शोभा देती है?
कहा कि किसी भी समुदाय विशेष के प्रति बयानबाजी नहीं होनी चाहिए। प्रदेश में कानून व्यवस्था चरमरा गई है, लेकिन पुलिस लाठीचार्ज जैसी घटनाओं में एक्टिव हो जाती है।
सीएम कुछ भी टिप्पणी कर देते हैं और फिर बयान से पलटकर जिम्मेदारी मीडिया पर डाल देते हैं। कहा कि गद्दी समुदाय को जनजातीय का दर्जा दिलाने में भी केंद्र की अटल सरकार का विशेष योगदान रहा है।
धूमल ने भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की ओर से हिमाचल में चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ने के बयान के प्रश्न पर टिप्पणी करने से इनकार किया। पूर्व सांसद राजन सुशांत की पार्टी में वापसी के प्रश्न पर धूमल ने कहा कि यह प्रदेेशाध्यक्ष और महामंत्री के अधिकार क्षेत्र में है।
बर्बरता बर्दाश्त नहीं होगी: पटियाल
पूर्व नप अध्यक्ष कमला पटियाल ने कहा कि मैकलोडगंज में जिस प्रकार पुलिस ने बर्बरतापूर्ण गद्दी समुदय के लोगों पर लाठीचार्ज किया, यह बर्दाश्त नहीं होगा।
गद्दी समुदाय को कमतर आंकना पड़ेगा मंहगा: ओंकार
पार्षद ओंकार नैहरिया ने कहा कि गद्दी समुदाय के खिलाफ बयान देकर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कमतर आंका है। मुख्यमंत्री इसके परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें।
सीएम कर रहे हिटलर की तरह काम: नैहरिया
गद्दी युवा नेता विशाल नैहरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री हिटलर की तरह काम कर रहे हैं। पहले गद्दी समुदाय का उपहास बनाया। अब निहत्थे लोगों पर लाठीचार्ज करवाया जा रहा है।