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...तो शायद न बनता हिमाचल

Tue, 15 Apr 2014 07:53 PM IST
Updated Tue, 15 Apr 2014 07:53 PM IST
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himachal day special, foundation laid by several leaders

शायद हिमाचल का 15 अप्रैल 1948 को गठन नहीं होता, अगर इसकी नींव सैकड़ों प्रजामंडल क्रांतिकारियों ने पहले ही तैयार नहीं कर दी होती।

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हिमाचल निर्माण के प्रमुख आंदोलन का नेतृत्व भले ही डॉ. वाईएस परमार ने किया, परंतु इन सैकड़ों गुमनाम हीरो ने आंदोलन के द्वारा अलग प्रांत की जमीन तैयार की।

15 अप्रैल 1948 में हिमाचल का गठन 30 छोटी-बड़ी पहाड़ी रियासतों को इकट्ठा कर किया गया। ये रियासतें चंबा, मंडी, सुकेत, सिरमौर, बुशहर, जुब्बल, क्योंथल, बाघल, भज्जी, थरोच, कुमारसैन, बलसन, महलोग, कोटी, बघाट, ठियोग, धामी, मधान, खनेटी, शांगरी, कुठाड़, रावीं, मांगल, घूंड, देलठ, कुनिहार, ढाढ़ी, बेजा, दरकोटी और रतेश थीं।

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21 दिसंबर 1947 को हुई पहली बैठक

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हिमाचल को एक पहाड़ी प्रांत के रूप में गठित करने का प्रस्ताव सर्वप्रथम 21 दिसंबर 1947 को शांगरी रियासत की राजधानी बड़ा गांव में हिमालय हिल स्टेट्स रीजनल काउंसिल के सम्मेलन में पारित किया गया।

इसकी अध्यक्षता काउंसिल के अध्यक्ष सत्यदेव बुशहरी ने की। इसमें कई अहम सदस्यों ने हिस्सा लिया था।

इसमें भागमल सौहटा, हीरा सिंह पाल, भास्करानंद, स्वार्मी पूर्णानंद, ठाकुर हरिदास, पंडित सीताराम, चिरंजीलाल वर्मा जैसे पहाड़ी नेताओं ने हिस्सा लिया।

अलग संघ बनाने का प्रयास

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शिमला पहाड़ी रियासत के शासकों ने अलग रियासती संघ बनाने का प्रयास किया। 26 जनवरी 1948 को पहाड़ी रियासतों के शासकों और प्रजामंडल के प्रतिनिधियों का एक सम्मेलन बुलाया गया।

यह सोलन के दरबार हाल में हुआ। इसमें पहाड़ी रियासतों के राजाओं और प्रजामंडल के 27 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसकी अध्यक्षता बघाट के राजा दुर्गा सिंह ने की।

इसी सम्मेलन में पहाड़ी राज्य का हिमाचल प्रदेश नाम रखने पर विचार हुआ। ‘विशाल हिमाचल’ पुस्तक के लेखक एवं राज्य भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग में व्युत्पत्तिविद गोपाल दिलैक इन तथ्यों की पुष्टि करते हैं।

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पहले बना हिमालयन हिल स्टेट्स सब रीजनल काउंसिल

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प्रजामंडल के प्रतिनिधियों ने 4 जनवरी 1948 को शिमला, 13 जनवरी 1948 को कोटगढ़ और 19 जनवरी 1948 को रामपुर में सम्मेलन किए।

जून 1947 में हिमालयन हिल स्टेट्स सब रीजनल काउंसिल भी बनाई गई। इसके प्रधान डॉ. वाईएस परमार थे।

उनके सहयोगी पंडित पदमदेव, शिवानंद रमोल, तेज सिंह निधड़क, देवीराम उपाध्याय आदि थे।

इस संगठन ने भी 25 जनवरी 1948 को शिमला के गंज बाजार में हिमालय प्रांत के गठन का प्रस्ताव रखा।

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