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Himachal: जीन बदलकर आलू की नई किस्में विकसित करेगा सीपीआरआई शिमला, उत्कृष्टता केंद्र शुरू

Sat, 02 May 2026 06:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 02 May 2026 06:00 AM IST
सार

जीन में बदलाव कर आलू की किस्में विकसित करने वाला सीपीआरआई देश का पहला संस्थान होगा। बागवानी के लिए बंगलूरू और सब्जियों के लिए वाराणसी को जीनोम एडिटिंग उत्कृष्टता केंद्र स्वीकृत हुए हैं।
 

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Himachal: CPRI Shimla to develop new potato varieties by modifying genes
सीपीआरआई में आईसीएआर के महानिदेशक ने किया निरीक्षण। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 शिमला स्थित केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) अब ब्रीडिंग तकनीक के साथ जीन बदलकर आलू की नई किस्में विकसित करेगा। शुक्रवार को संस्थान में जीनोम एडिटिंग उत्कृष्टता केंद्र शुरू किया गया। जीन में बदलाव कर आलू की किस्में विकसित करने वाला सीपीआरआई देश का पहला संस्थान होगा। बागवानी के लिए बंगलूरू और सब्जियों के लिए वाराणसी को जीनोम एडिटिंग उत्कृष्टता केंद्र स्वीकृत हुए हैं। इस अत्याधुनिक केंद्र से जीन में बदलाव कर ऐसी नई आलू की किस्में विकसित की जा सकेंगी, जो पौष्टिक, रोग प्रतिरोधक और जलवायु के अनुकूल होंगी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एवं डीएआरई सचिव डॉ. एमएल जाट ने संस्थान के नए संग्रहालय और जीनोम एडिटिंग उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन किया। उनके साथ सहायक महानिदेशक डॉ. सुधाकर पांडे मौजूद रहे।

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उन्होंने प्रोपोनिक्स सुविधा, जीनोम एडिटिंग लैब पादप संरक्षण, फसलोत्तर एवं बीज प्रौद्योगिकी प्रयोगशालाओं सहित आलू जर्मप्लाज्म भंडार का अवलोकन किया। उन्होंने किसानों और वैज्ञानिकों से नई तकनीकों पर चर्चा भी की। वैज्ञानिकों ने भी उन्हें आलू की नई तकनीकों, बीज उत्पादन और रोग नियंत्रण से जुड़े अनुसंधानों की जानकारी दी। संस्थान के सभागार में कर्मचारियों और छात्रों को संबोधित करते हुए डॉ. जाट ने कृषि अनुसंधान में पारदर्शी डाटा प्रबंधन और अनुसंधान नैतिकता को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि केवल नई तकनीक विकसित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों तक उसकी पहुंच जरूरी है। उन्होंने वैज्ञानिकों को जेंडर रणनीति तथा एमईएलआईए (निगरानी, मूल्यांकन, अधिगम एवं प्रभाव आकलन) जैसे विषयों की जानकारी भी दी। संस्थान के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह ने संस्थान की गतिविधियों और उपलब्धियों को लेकर प्रस्तुति दी। सामाजिक विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डाॅ. आलोक कुमार ने संस्थान की ओर से डॉ. जाट का धन्यवाद किया।

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हितधारकों के साथ खाद्य सुरक्षा रणनीति पर चर्चा
हितधारकों के लिए आयोजित सम्मेलन में बीज कंपनियों, प्रसंस्करण उद्योगों, किसान उत्पादक संगठनों और प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। सम्मेलन में आलू निर्यात बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण बीज की रियल टाइम उपलब्धता सुनिश्चित करने और बीज ग्रामों को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। डॉ. जाट ने कुफरी और फागू स्थित फार्मों का भी दौरा कर बीज उत्पादन और प्रसंस्करण सुविधाओं की समीक्षा की और शिमला स्थित अन्य आईसीएआर संस्थानों के वैज्ञानिकों के साथ बैठक कर खाद्य सुरक्षा रणनीति पर चर्चा की।

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