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दिल्ली से लौटते ही बदल गए कांग्रेस नेताओं के सुर, पढ़िए किसने क्या कहा
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sun, 23 Apr 2017 05:27 PM IST
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सीएम वीरभद्र सिंह की ईडी में हुई सामान्य पूछताछ के बाद दिल्ली से हिमाचल लौटते ही दिग्गज कांग्रेस नेताओं के सुर बदले हुए हैं। दो दिन पहले सीएम को ईडी ने पूछताछ के लिए बुलाया तो उनके साथ कई बार टकराव में आ चुके कई कांग्रेस नेता भी दिल्ली में डटे थे। माना जा रहा था कि ये सब एक रणनीति के तहत ही दिल्ली गए थे।
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हालांकि, दिल्ली से हिमाचल लौट चुके कुछ नेताओं में से कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू और परिवहन मंत्री जीएस बाली कह रहे हैं कि वे अपने-अपने काम से दिल्ली में थे। वे इस बात को मानने को तैयार नहीं हैं कि उनके दिल्ली दौरे का सीएम वीरभद्र सिंह की पूछताछ से किसी भी तरह का कोई संबंध रहा है।
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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने सीएम वीरभद्र सिंह को पूछताछ के लिए 20 अप्रैल को दिल्ली बुलाया था। सीएम नई दिल्ली पहुंचे तो कई मंत्रियों सहित पार्टी के कुछ दिग्गज नेता भी नई दिल्ली पहुंच गए। सूत्रों की मानें तो ऐसे कई नेता गुपचुप आलाकमान के नेताओं से भी मिले और वीरभद्र मामले के बाद प्रदेश के सियासी हालात की अपने-अपने तरीके से चर्चा करते रहे।
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सूत्रों की मानें तो वीरभद्र सिंह के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष विरोध में रहते आए कई नेताओं की ओर से कयास ये लगाए जा रहे थे कि ईडी की पूछताछ के बीच ही सीएम पर कोई गंभीर कार्रवाई भी हो सकती है, मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ। सामान्य पूछताछ की सूचना मिलते ही पार्टी के कई दिग्गज नेता हिमाचल लौट आए हैं। हालांकि, कुछ अभी भी नई दिल्ली में हैं।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू का कहना है कि वे आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के घोषणापत्र में विधायकों की संपत्ति सार्वजनिक करने का मामला जुड़वाने पर चर्चा करने नई दिल्ली गए थे। परिवहन मंत्री जीएस बाली भी नई दिल्ली से
लौटकर शुक्रवार को कुल्लू चले गए थे। उन्होंने कहा कि वे अपने विभागों से संबंधित मंत्रालयों में गए थे। दो प्रोजेक्टों को मंजूर भी मिल चुकी है। हो सकता है कि हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की शुरुआत पीएम के हाथों ही हो जाए।
नगर निगम चुनाव में मुझे स्टार प्रचारक बनाया, इसलिए गया दिल्ली: कौल सिंह
स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर शनिवार को राज्य सचिवालय में अपने कार्यालय में थे। कौल सिंह ने अपने दिल्ली दौरे पर सफाई दी कि उन्हें दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय माकन ने नगर निगम दिल्ली के चुनाव में स्टार प्रचार के रूप में बुलाया है। कौल सिंह ने शनिवार को मीडिया को अजय माकन से 10 अप्रैल को आया पत्र भी दिया।
सचिवालय में कौल सिंह और सुक्खू में एक घंटे तक चर्चा
नई दिल्ली से शिमला लौटने के बाद कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू और स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर में शनिवार को लंबी मंत्रणा हुई। सूत्रों ने बताया कि सुक्खू ने कौल सिंह ठाकुर के कार्यालय जाकर उनसे प्रदेश के सियासी मसलों पर चर्चा की।
उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र से जुडे़ स्वास्थ्य महकमे से जुडे़ कुछ मामले भी कौल सिंह के सामने रखे। सचिवालय के गलियारों में कौल सिंह और सुक्खू की शनिवार की इस भेंट के भी कई सियासी मतलब निकाले जा रहे थे।
मंत्रियों, विधायकों के भाजपा से संपर्क में होने की बात सही नहीं: स्टोक्स
सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री विद्या स्टोक्स ने कहा कि कांग्रेस के तीन मंत्री और छह विधायकों के कथित रूप से भाजपा के संपर्क में होने की सूचना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि बात पूरी तरह निराधार, मनघड़ंत और तथ्यों से परे है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस पार्टी और सरकार मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में पूरी तरह स्थिर और संगठित है।
उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह सब बातें राजनीति से प्रेरित हैं और लोगों को भ्रमित करने के नजरिए से हो रही हैं।उन्होंने शनिवार को जारी बयान में कहा कि प्रदेश में भाजपा गत सवा चार साल से इसी तरह की नकारात्मक राजनीति कर रही है। ये लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
स्टोक्स ने कहा कि सवा चार साल में प्रदेश में हुआ अभूतपूर्व विकास भाजपा को रास नहीं आ रहा है, इसलिए वह इस तरह के ओछे हथकंडे अपना रहे हैं। यह बड़े आश्चर्य की बात है कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भेंट
के कोई और ही मायने निकाले जा रहे हैं, जबकि यह भेंट एक शिष्टाचार भेंट थी। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता प्रदेश में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की नापाक कोशिश कर रहे हैं, जिसे किसी भी स्तर पर प्रदेश की जनता सहन नहीं करेगी।
प्रधानमंत्री के प्रदेश के प्रस्तावित दौरे के दृष्टिगत भाजपा के नेता इस तरह के शिगूफे छोड़ रहे हैं, जिससे उनका कोई लाभ नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि वास्तविकता तो यह है कि प्रदेश कांग्रेस और सरकार का कोई भी व्यक्ति भाजपा के संपर्क में नहीं है।
भाजपा पूरी तरह बिखरी हुई है और भाजपा के नेता पशोपेस में हैं कि किस गुट का साथ दें। उन्होंने भाजपा के नेताओं को सुझाव दिया कि वे कांग्रेस की चिंता करना छोड़ दें और बेहतर होगा कि वे अपने राजनीतिक अस्तित्व को बनाए रखने की चिंता करें।