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Himachal Cherry: गर्मी के चलते घटी चेरी की गुणवत्ता, दाम गिरे, 150 से 250 रुपये में बिक रहा बॉक्स
Thu, 30 May 2024 09:27 PM IST
अंकेश डोगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Thu, 30 May 2024 09:27 PM IST
सार
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में भट्ठाकुफर फल मंडी में चेरी की फसल की गुणवत्ता गर्मी की वजह से कम हो गई है। इसकी वजह से इसके दामों में भी गिरावट आ गई है।
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हिमाचली चेरी।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
बढ़ती गर्मी से जनजीवन के साथ फसलें भी प्रभावित हो रही हैं। राजधानी की भट्ठाकुफर फल मंडी में इन दिनों पहुंच रही चेरी की फसल की गुणवत्ता गर्मी की वजह से कम हो गई है। इसकी वजह से इसके दामों में भी गिरावट आ गई है। शुरुआती दिनों में 200 से 500 रुपये में बिकने वाला एक बॉक्स 150 से 250 रुपये में बिक रहा है।
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दामों में आई गिरावट से बागवानों की परेशानियां बढ़ गई हैं। गर्मी की वजह से चेरी, प्लम, आडू, खुमानी सहित अन्य स्टोन फ्रूट का आकार छोटा है। वहीं फल सिकुड़ने लग गया है। इसकी वजह से फल में रस की मात्रा भी कम हो गई है। अच्छी गुणवत्ता वाली चेरी न आने की वजह से बाहरी राज्यों में भी इसे ज्यादा पसंद नहीं किया जा रहा। इसकी वजह से मांग घट गई है।
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ढली मंडी पीके ट्रेडर्स 12 नंबर फर्म के संचालक कृष्ण कुमार सूद ने बताया कि गर्मी की वजह से चेरी की गुणवत्ता गिर गई है। जहां एक दिन में एक हजार बॉक्स बिकते थे, वहीं अब 300 बॉक्स ही बिक रहे हैं। आढ़तियों ने बताया ने बताया कि इसमें खर्चा ज्यादा आ रहा है, क्योंकि बाहरी राज्यों में इसे हवाई सेवा (कारगो) से भेजना पड़ता है। हिमाचल प्रदेश में करीब 500 हेक्टेयर पर चेरी की खेती होती है। शिमला, कुल्लू, मंडी, चंबा, लाहौल-स्पीति और किन्नौर जिलों में सालाना 600 से 800 मीट्रिक टन चेरी का उत्पादन होता है। कुल उत्पादन का करीब 90 फीसदी अकेला शिमला जिला करता है। शिमला के नारकंडा, कोटगढ़, थानाधार, कुमारसैन और बागी चेरी उत्पादन में अग्रणी हैं।
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मंडी में इन दिनों जो भी स्टोन फ्रूट की फसल पहुंच रही है वह गर्मी से प्रभावित हुई आ रही है। सबसे ज्यादा प्रभावित चेरी की फसल हुई है। इसके दाम गिर गए हैं। जल्दी बारिश न हुई तो फसल ज्यादा खराब हो जाएगी- प्रताप चौहान, अध्यक्ष, ढली सब्जी और फल मंडी आढ़ती एसोसिएशन