मंत्रियों के विभाग तय करने के पीछे छिपा है भविष्य का एजेंडा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के मंत्रियों को विकास के तय एजेंडे के तहत महकमे बांटे हैं। संघ और विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे युवा मंत्रियों पर अधिक भरोसा जताया गया है। मंत्रियों के मन की सुनने के बजाय पार्टी ने अपने हिसाब से जिम्मेदारी सौंपी।
मंत्रालयों को सेक्टरों के हिसाब से विभाजित करने का फार्मूला इस्तेमाल हुआ है। एक दूसरे से संबंध रखने वाले विभागों को एक मंत्री के पास रखा गया है।
स्वास्थ्य मंत्री के पास चिकित्सा शिक्षा, आयुष जैसे विभाग दिए गए तो उद्योग मंत्री को व्यावसायिक शिक्षा, तकनीकी शिक्षा देकर उनके लिए पूरे क्षेत्र को विकसित करने का जिम्मा सौंपा गया।
आम तौर पर मलाईदार माने जाने वाले लोकनिर्माण, आबकारी आदि महकमों के कस्टोडिन सीएम रहेंगे। भाजपा ने इससे न केवल मुख्यमंत्री का कंट्रोल शासन पर बढ़ाया है, बल्कि भ्रष्टाचार पर लगाम कसने का दांव भी खेला।
युवाओं को अधिक जिम्मेदारी
भाजपा ने मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रिमंडल के चेहरे और अब उनके विभाग तय करने में नया फार्मूला अपनाया है। प्रदेश की सियासत में भाजपा का यह प्रयोग नए सियासी ट्रेंड की ओर संकेत है। जयराम युग का भविष्य बेहतर बनाने के लिए उनको नए मंत्रियों की टीम दी गई है। कई पूर्व मंत्रियों को बाहर रखकर पार्टी ने 6 नए चेहरे मंत्रिमंडल में शामिल किए।
मंत्रियों के नाम तय करने में जितना मंथन केंद्रीय नेतृत्व ने किया, उतना ही उनको दिए विभागों के लिए हुआ है। पार्टी जल्दबाजी के बजाए फूंक-फूंक कर दांव खेल रही है। 60 की उम्र पार कर चुके वरिष्ठ मंत्रियों का काम कम रखकर युवाओं को अधिक जिम्मेदारी दी गई है।
वरिष्ठ मंत्रियों को नजरअंदाज नहीं किया गया, बल्कि उनके पुराने अनुभव को देखा गया। कई बार मंत्री रहे महेंद्र सिंह की पसंद सुनी गई। उन्हें सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य के साथ बागवानी जैसे बड़े महकमे उनके पुराने अनुभव के कारण मिले, लेकिन लोक निर्माण विभाग का खासा अनुभव उन्हें विभाग नहीं दिला पाया।
हर मंत्री को एक क्षेत्र विशेष की जिम्मेदारी
किशन कपूर को परिवहन, उद्योग मंत्रालय के अनुभव के बावजूद केवल खाद्य आपूर्ति दिया गया। अनिल शर्मा को बड़ा महकमा ऊर्जा और उससे संबंधित विभाग दिए।
सुरेश भारद्वाज पिछली विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक थे तो उन्हें संसदीय मामले सौंपे। कानून में उनकी रुचि के चलते यह महकमा भी दिया गया, जबकि मुख्य महकमा शिक्षा और उच्च शिक्षा रखा गया।
युवा चेहरों में अनुभवी सरवीण को शहरी विकास से जुड़े तमाम विभाग मिले हैं। अनुभवी रामलाल मारकंडा को कृषि मुख्य विभाग दिया गया है। पहली बार मंत्री बनने वालों में विपिन परमार को स्वास्थ्य से जुड़े सभी महकमे दिए हैं।
विक्रम सिंह को उद्योग से संबंधित विभाग तो वीरेंद्र कंवर को ग्रामीण क्षेत्रों के विकास से जुड़े पंचायती राज, पशुपालन जैसे महकमे दिए हैं।
सबसे युवा चेहरे डॉ. राजीव सैजल को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता और सहकारिता दिया गया है। हर मंत्री को मिली जिम्मेदारी एक क्षेत्र विशेष की है। अब उन्हें उस क्षेत्र में विकास को दिशा देने की जिम्मेदारी रहेगी।
सीएम की बढ़ाई जवाबदेही
मुख्यमंत्री जयराम के पास कई महकमे दिए गए हैं। यह भाजपा शासित अधिकांश राज्यों में प्रयोग किया जा रहा है। वित्त और प्लानिंग जैसे विभाग सभी मंत्रालय से संबंधित हैं, जिससे उनकी नजर हर विभागी मंत्री के कामकाज और नीतिगत फैसलों पर रहेगी।
सबसे अधिक बजट वाले विभागों में से एक लोक निर्माण विभाग सीधा जनता से जुड़ा महकमा है, जिससे प्रदेश में एक समान निर्माण योजनाओं का क्रियान्वयन और मॉनीटरिंग सीएम कर सकेंगे।
आबकारी जैसे महकमा सबसे बड़ा राजस्व देने वाला विभाग जिसे मुख्यमंत्री ने अपने पास रखा है। गृह और कार्मिक आम तौर मुख्यमंत्री अपने पास रखते हैं।