HP Cabinet Meeting: इस दिन होगी हिमाचल मंत्रिमंडल की बैठक, आरडीजी बंद होने पर लिए जा सकते हैं कड़े फैसले
प्रदेश की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए प्रदेश सरकार ने 12 फरवरी को मंत्रिमंडल की बैठक बुला ली है। बैठक में आय के साधन बढ़ाने पर चर्चा होगी।
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हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की आगामी बैठक की तिथि तय हो गई है। मंत्रिमंडल की बैठक मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में 12 फरवरी को राज्य सचिवालय में आयोजित की जाएगी। सुबह 11.00 बजे प्रदेश सचिवालय के शिखर सम्मेलन हाल में शुरू होने वाली इस बैठक में कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। बैठक में प्रदेश की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए और आय के साधन बढ़ाने पर चर्चा होगी। वित्त विभाग की ओर से कैबिनेट में यह प्रस्ताव लाया जा रहा है। आरडीजी (राजस्व घाटा अनुदान) बंद होने के बाद हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति और गड़बड़ा गई है।
राज्य के बजट में 13 फीसदी योगदान आरडीजी का
राज्य सरकार कर्मचारियों व पेंशनरों को नए वेतनमान का एरियर देने की स्थिति में नहीं है। महंगाई भत्ता फ्रीज करने व सभी सब्सिडी बंद करने की नौबत आ गई है। प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार की ओर से दी गई प्रस्तुति में यह बात कही गई है। राज्य के बजट में 13 फीसदी योगदान आरडीजी का रहा है। राज्य का 48,000 करोड़ रुपये का प्रतिबद्ध खर्च है, जो करना ही है।
कैबिनेट में कड़े फैसले लिए जाएंगे
अपना राजस्व ले-देकर 18 हजार करोड़ रुपये का है। केंद्रीय करों के हिस्से के रूप में 14 हजार करोड़ रुपये ही मिलेंगे। कर्ज 10 हजार करोड़ ही ले पाएंगे। यानी 42 हजार करोड़ का ही प्रबंध हो पाएगा। इन सभी मामलों पर चर्चा की जानी है। इसको लेकर मंत्रियों और अधिकारियों के सुझाव भी लिए जाएंगे। बताया जा रहा है कि कैबिनेट में कड़े फैसले लिए जाएंगे।
आरडीजी बंद होने के बाद वित्तीय स्थिति पर चर्चा के लिए बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक : विनय कुमार
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने राजस्व घाटा अनुदान यानी आरडीजी बंद होने के बाद वित्तीय स्थिति पर चर्चा के लिए बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक में भाजपा के शामिल न होने पर कड़ी नाराजगी और हैरानी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह साफ दर्शाता है कि भाजपा को प्रदेश की कोई भी चिंता नहीं है। विनय कुमार ने अपने बयान में यह भी जोड़ते हुए कहा कि जब-जब प्रदेश को जरूरत पड़ी है। भाजपा हमेशा ही अपनी जिम्मेदारी से भागी है। जब राज्य पूर्ण राज्यत्व की लड़ाई लड़ रहा था, उस समय भाजपा नेताओं ने इसका खुला विरोध किया था और कहा था कि स्टेटहुड को मारो ठुड। जब प्रदेश में भारी आपदा आई, उस समय विधानसभा में चर्चा से बचने का काम भी भाजपा ने ही किया। सभी दलों के साथ मिलकर केंद्र सरकार के पास जाने के लिए आपदा पर प्रस्ताव पास हुआ, लेकिन भाजपा ने वहां से भी अपनी पीठ दिखाई । आज, जब राजस्व घाटा अनुदान बंद होने पर प्रदेश के भविष्य को लेकर अहम बैठक बुलाई गई, भाजपा नेताओं ने उसमें भी शामिल होने से किनारा कर लिया।