एक क्लिक में पढ़िए कैबिनेट के अहम फैसले
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चौतरफा विरोध के बाद राज्य सरकार ने आखिरकार अवैध घर को वैध करने के लिए लाए गए शहर एवं नगर नियोजन (संशोधन) अध्यादेश को वापस लेने का फैसला कर लिया। बुधवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया। कैबिनेट बैठक में इस संबंध में संशोधित अध्यादेश लाने पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
इसके अलावा कैबिनेट ने हिमाचल प्रदेश शहर एवं नगर नियोजन नियम, 1978 को संशोधित करने की भी मंजूरी प्रदान की है जिसमें भवन निर्माण के संबंध में बने नियमों कई परिवर्तन व नए प्रावधान किए गए हैं। पिछली कैबिनेट बैठक में शहरी आवास मंत्री भी मौजूदा अध्यादेश की आलोचना कर चुके थे।
उनकी ओर से अध्यादेश पर तर्क दिया गया कि घरों को वैध कराने के लिए जो दरें तय की गई हैं, वह व्यवहारिक नहीं हैं। इस कारण जनता इसके प्रति रुचि नहीं ले रही है। इसी का नतीजा रहा कि अवैध भवनों को नियमित कराने के लिए केवल चंद लोगों के आवेदन आए। इससे सरकार भी हैरत में पड़ गई।
इस कारण कैबिनेट ने बुधवार को अध्यादेश वापस लेने का निर्णय लिया। अब फिर से नए सिरे से अध्यादेश लाने पर कैबिनेट ने विचार किया। नई दरें क्या होंगी, इस पर पूरा होमवर्क करने के बाद ही संशोधित अध्यादेश लाया जाएगा।
सरकारी खरीद में एंट्री टैक्स पर दो फीसदी बढ़ोत्तरी
प्रदेश में राजस्व बढ़ाने और औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए बाहरी कंपनियों से सरकारी खरीद पर दो फीसदी एंट्री टैक्स बढ़ाने का फैसला लिया है। बुधवार को कैबिनेट की बैठक में आबकारी एवं कराधान विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। यह व्यवस्था सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों की खरीद पर लागू होगी।
प्रदेश से बाहर की कंपनियों से किसी भी प्रकार के समान खरीद की स्थिति में अब एंट्री टैक्स तीन से बढ़ाकर पांच फीसदी कर दिया गया है। जबकि हिमाचल में स्थित औद्योगिक इकाइयों से खरीद पर किसी प्रकार का टैक्स नहीं लिया जाएगा। सरकार की ओर से यह कदम प्रदेश में उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए लिया गया है।
ताकि हिमाचल के उद्योगों को बाहरी कंपनियों के मुकाबले खड़ा किया जा सके। क्योंकि, टेंडर होने की स्थिति में बाहर की कंपनियों को अधिक लाभ हो रहा था। सरकार के इस कदम से प्रदेश को सालाना अरबों रुपये राजस्व की आय होने का अनुमान है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद जल्द ही इस सिलसिले में अधिसूचना जारी होने की संभावना है।
29 पद स्वीकृत, 100 कामगार होंगे अटैच
कैबिनेट ने मत्स्य विभाग में अनुबंध आधार पर सीधी भर्ती से विभिन्न श्रेणियों के 12 पद भरने की स्वीकृति प्रदान की। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में कंप्यूटर प्रोग्रामर के एक पद और सहायक प्रोग्रामर के 12 पद सृजित करने को मंजूरी दी गई।
वन विकास निगम में अनुबंध के आधार पर खुले बाजार से 100 अकुशल/अर्द्ध कुशल कामगारों को अटैच करने की स्वीकृति दी गई। इसके अलावा ऊना जिले के राजकीय डिग्री कॉलेज में अनुबंध के आधार पर रसायन, बायोलॉजी और गणित के सहायक प्रोफेसरों के चार अतिरिक्त पद सृजित करने का भी निर्णय लिया गया।
कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसले
- कोटला (ज्यूरी) में राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज स्थापित करने को स्वीकृति
- ठियोग के बासाधार और चौपाल के नौरा में पीएचसी शुरू करने का फैसला
- कांगड़ा के चढि़यार, मुलथान और बरोह में पुलिस पोस्ट शुरू करने को मंजूरी
- सोलन के कृष्णगढ़ (कुठाड़) दशहरा मेले को जिला स्तरीय दर्जा दिया गया
- एसजेवीएनएल में सरकार की हिस्सेदारी 25 से बढ़ाकर 26 फीसदी की गई
- टांडा मेडिकल कॉलेज में लोनिवि के नए मंडल और स्टॉफ को दी स्वीकृति
- चंबा में एनएच-154-ए के लिए राष्ट्रीय उच्च मार्ग डिवीजन सृजित होगा
- एफसीआई को गोदामों के निर्माण के लिए भूमि स्थानांतरित करने का निर्णय
- छह मेगावाट के बनेड़-2 पावर प्रोजेक्ट को नीति अनुसार बदलाव करने की स्वीकृति
शहर में घर बनाने को अब मिट्टी जांच जरूरी
शहर में घर बनाने के लिए अब मिट्टी की जांच कराना जरूरी है। अगस्त 2014 में टीसीपी संशोधित एक्ट को विधानसभा में पास किया गया था। इसी के आधार पर सरकार ने नए नियम तैयार किए हैं, जिसमें यह प्रावधान किया जा रहा है। नए नियमों को बुधवार को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और शहरी निकायों के दायरे में बनने वाले भवनों की मिट्टी जांच के बाद ही निर्माण की अनुमति दी जाएगी।
सरकार ने आपदा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। कई ऐसे स्थानों पर भवनों का निर्माण हुआ है जो सिंकिंग जोन हैं। बारिश से इन भवनों को खतरा रहता है। मिट्टी की जांच के बाद खतरा नहीं रहेगा। बताया जा रहा है कि नगर निगम की परिधि और शहरी निकायों में भवन निर्माण के अलग नियम होंगे जबकि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के दायरे में मकान की लोकेशन अलग होगी। टीसीपी नियम में चेंज आफ लेंड यूज की फीस भी आधी कर दी गई है। टीसीपी नियम के मुताबिक अब टीसीपी और शहरों में बिना नक्शे से भवनों का निर्माण नहीं होगा। नक्शा पास कराना अनिवार्य कर दिया गया है।
लोग भवन निर्माण करने से पहले नक्शा पास नहीं कराते तो सरकार सख्ती करेगी। भवन निर्माण के वक्त सेट बैक का भी ध्यान रखना होगा। सड़क के साथ प्लॉट के फ्रंट से 3 जबकि अन्य तीन किनारों पर लोगों को 2-2 मीटर सेट बैक छोड़ने होंगे। सड़क से दूर प्लॉट के फ्रंट से ढाई जबकि अन्य तीन किनारों से 2-2 मीटर सेट बैक छोड़ने होंगे।
एसजेवीएनएल में हिमाचल का 26 फीसदी शेयर
हिमाचल प्रदेश सरकार ने सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड (एसजेवीएनएल) में हिस्सेदारी बढ़ाने का निर्णय लिया है। बुधवार को कैबिनेट में इसकी मंजूरी दी गई है। सरकार के इस कदम से हिमाचल का अधिकार बढ़ जाएगा। सरकार अपने दो निदेशक मुख्यालय में बैठा सकती है। इसके लिए प्रदेश सरकार को तकरीबन 50 करोड़ रुपये के शेयर खरीदने होंगे।
सूत्रों का कहना है कि दो माह पहले कैबिनेट में एसजेवीएनएल से हिमाचल का शेयर बेचने का प्रस्ताव लगाया गया था। इस प्रस्ताव का प्रदेश के एक सीनियर मंत्री ने जोरदार विरोध किया था। इसके बाद प्रस्ताव को कैबिनेट ने टर्न डाउन कर दिया था। उसी दौरान मंत्री की ओर से सुझाव दिया गया था कि शेयर बेचने के बजाए सरकार एक फीसदी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाए, जिससे निगम में सरकार का अधिकार बढ़ सके।
उसी सुझाव के आधार पर बुधवार को हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्रस्ताव लाया गया था, जिसे कैबिनेट ने मंजूर कर दिया। हिमाचल अब 26 फीसदी का हिस्सेदार होगा। इसके लिए सरकार को एक फीसदी के अतिरिक्त शेयर खरीदने होंगे। इससे भविष्य में सरकार की आय भी बढ़ेगी।
क्या होगा पुराने अध्यादेश में आवेदन करने वालों का?
प्रदेश सरकार ने पुराना अध्यादेश वापस कर लिया है। ऐसे में सवाल यह है कि जिन लोगों ने अपने भवनों को नियमित करने के लिए आवेदन कर दिया है, उनका क्या होगा ? हालांकि टीसीपी का दावा है कि उनके पास अभी तक कोई भी भवन वैध करने के लिए आवेदन नहीं आया है। जबकि नगर निगम में कुछेक लोगों ने इस पालिसी के तहत आवेदन किए हैं।
सरकार की ओर से लाई गई पालिसी के तहत प्रदेश में धड़ाधड़ अवैध निर्माण हो रहा है नगर निगम और टीसीपी ने अवैध निर्माण करने वालों को नोटिस जारी कर रहा है। सरकार का दावा है कि अवैध निर्माण को रोकने के लिए भवनों की वीडियोग्राफी की जाएगी, ताकि अवैध निर्माण पर अंकुश लगाया जा सके।
अवकाश पर नहीं हुआ फैसला
हिमाचल प्रदेश में किस-किस तिथि को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाए, इसका प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग की ओर लाया गया था। लेकिन इस पर कैबिनेट में कोई निर्णय नहीं हो पाया। सूत्रों ने बताया कि अगली कैबिनेट की बैठक में फिर से इस प्रस्ताव को लाया जाएगा।
लाल बत्ती पर भी निर्णय नहीं
विधायकों, अधिकारियों को लाल बत्ती देने के मामले में भी कैबिनेट स्तर पर कोई निर्णय नहीं हो पाया। सूत्रों ने बताया कि इस प्रस्ताव पर भी कैबिनेट में एक राय नहीं थी। यह प्रस्ताव भी लंबे समय से कैबिनेट की बैठकों में लगाया जा रहा है।