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चुनाव से पहले कई मसलों पर अड़े अफसर, मनमाफिक नहीं हुए कैबिनेट में फैसले

Thu, 05 Oct 2017 01:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 05 Oct 2017 01:14 PM IST
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himachal cabinet decisions objections by officers

सरकार एक बार फिर शासन की आपत्तियों के चलते मन मुताबिक फैसले नहीं ले पाई है। अधिकारियों के दबाव के चलते सोने की दो रिफाइनरियों को 14 करोड़ की राहत देने का मामला दोबारा कैबिनेट में आया। सरकार एक माह पहले दोनों रिफाइनरियों को बड़ी राहत दे चुकी थी, लेकिन वित्त और विधि विभाग की आपत्तियों के चलते बुधवार को दोबारा लाना पड़ा।

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दोनों उत्पादकों पर वर्ष 2013 से एंट्री टैक्स का बकाया है, जिसे अब वसूलने के बाद फिर राहत दी जाएगी। बीमार उद्योग को लगभग तीन हजार करोड़ का राहत पैकेज भी सरकार नहीं पास कर पाई है। अधिकारियों ने तीन मंत्रियों मुकेश अग्निहोत्री, ठाकुर सिंह भरमौरी और प्रकाश चौधरी की सिफारिशों पर पलीता लगा दिया।
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बैठक में लंबे समय मुद्दे पर चर्चा हुई, जिसके बाद कई बदलाव कर पॉलिसी पास हुई। विभागीय अधिकारियों की आपत्ति के बाद अदानी ग्रुप, रिलायंस, एल एंड टी सहित आधा दर्जन ऊर्जा क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के एक हजार करोड़ के अपफ्रंट प्रीमियम को लौटाने का एजेंडा पास नहीं हुआ।

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अड़ गए अधिकारी

himachal cabinet decisions objections by officers

आचार संहिता से पहले सरकार की मानी जा रही अंतिम मंत्रिमंडल बैठक में सरकार कई लटके एजेंडा पास करवाने में कामयाब हुई, लेकिन अधिकारियों के अड़ने से सरकार के मंसूबे पूरी तरह कामयाब नहीं रहे।

तीन बड़े मामले कैबिनेट से पास करवाना सरकार के एजेंडे में था। एक मामला बीमार उद्योगों को बड़ी राहत देने का था, जिसके लिए मंत्रिमंडल की उपसीमित बनाई गई थी।

दूसरा मामला, सोने की रिफाइनरियों के 14 करोड़ टैक्स बकाया को माफ करने का था। इसके अलावा अदानी ग्रुप के 238 करोड़ लौटाए जाने थे। तीनों मामलों पर अधिकारी सरकार से सहमत नहीं थे, जिसके बावजूद कैबिनेट नोट बनाकर मामले लाए गए।

बीमार उद्योग और सोने के रिफाइनरी संचालकों को राहत दिलवाने में सरकार कामयाब रही, हालांकि अधिकारियों ने कई शर्तें और नीतिगत बदलाव करवा दिए। जलविद्युत परियोजनाओं के लिए आधा दर्जन कंपनियों को लगभग एक  हजार करोड़ रुपये लौटाने का मामला नहीं पारित हो सका।

नाराज होकर बैठक से चले गए बाली

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परिवहन मंत्री जीएस बाली की एकाएक मंत्रिमंडल की बैठक से निकल जाने से चर्चाओं का बाजार गर्म है। बैठक बीच में छोड़कर बाली अपने कक्ष में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू से भी मुलाकात की और फिर कांगड़ा के लिए निकल गए।

सूत्रों की माने तो जलविद्युत परियोजनाओं में निजी कंपनियों का अपफ्रंट प्रीमियम प्रस्ताव पारित नहीं होने को उनकी नाराजगी की वजह बताया जा रहा है। एक वजह एचआरटीसी कर्मचारियों के लिए पेंशन का कोर्पस फंड का एजेंडा भी नहीं आना बताया जा रहा है। हालांकि मंत्री बाली किसी भी नाराजगी की बात से इनकार कर रहे हैं।

कैबिनेट में भी नाराज रहे बाली

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परिवहन मंत्री जीएस कैबिनेट की बैठक शुरू होने से पहले लंबे समय तक मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठे रहे। इस दौरान उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री और स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर भी मौजूद रहे। लगभग दो बजे तक बाली अपने कक्ष में नहीं लौटे। इसके बाद शुरू हुई कैबिनेट में भी वे उखड़े उखड़े रहे।

अदानी ग्रुप सहित कई अन्य कंपनियों को अपफ्रंट प्रीमियम वापस करने के एजेंड़ा कैबिनेट में रखा गया, लेकिन पारित नहीं हुआ। बाली उसका समर्थन कर रहे थे। इसके बाद लगभग साढ़े बजे वे कैबिनेट से बाहर आ गए। माना जा रहा है कि बाली की दलील खारिज होने से वे नाराज हो गए।

उधर, जीएस बाली का कहना है कि वे सीएम को पहले ही अवगत करवा चुके थे कि उनको जल्दी जाना है। उनके सरदर्द भी हो रहा था और देर शाम तक हर हाल में कांगड़ा पहुंचना था। नाराजगी जैसी कोई बात नहीं है।

दो बार बदला कैबिनेट का समय

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कैबिनेट की बैठक का सरकार ने दो बार समय बदला। कैबिनेट के लिए दोपहर दो बजे समय निर्धारित किया गया था, लेकिन अचानक उसे बदल कर 12 बजे कर दिया गया। अधिकारी और कई मंत्री कैबिनेट बैठक के लिए पहुंचे।

मंत्रियों ने मुख्यमंत्री को अवगत करवाया गया कि केवल एक दर्जन एजेंडा ही लाए गए हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर अधिकारियों ने दो दर्जन एजेंडा प्रस्ताव और तैयार किये।

जिसके चलते दोबारा दोपहर दो बजे का समय तय किया गया। आखिर पौने तीन बजे कैबिनेट की बैठक शुरू हो पाई। 

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