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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   himachal budget for the financial year 2022-23 will be presented on March 4 in house of Himachal assembly

हिमाचल विधानसभा सत्र: चार मार्च को पेश होगा वित्तीय वर्ष 2022-23 का बजट, 15 को होगा पारित

Thu, 03 Feb 2022 06:03 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 03 Feb 2022 06:03 PM IST
सार

23 फरवरी को बजट सत्र की शुरुआत राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के बजट भाषण से होगी। 24 फरवरी को शोकोद्गार होगा। 26 फरवरी से राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होगी। तीन मार्च को गैर सरकारी सदस्य दिवस होगा। चार मार्च को जयराम सरकार अपने कार्यकाल का पांचवां बजट पेश करेगी। 

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himachal budget for the financial year 2022-23 will be presented on March 4 in house of Himachal assembly
हिमाचल प्रदेश विधानसभा(फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के 23 फरवरी से शुरू होने जा रहे बजट सत्र की समय सारिणी जारी हो गई है। इसके अनुसार मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर अगले वित्तीय वर्ष के बजट को चार मार्च को पेश करेंगे। 15 मार्च को इसे पारित किया जाएगा। इस सत्र में चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 के अनुपूरक बजट का 26 फरवरी को पारण होगा। इस बार नए संशोधित वेतनमान के लागू होने की वजह से यह बजट बढ़ा हुआ होगा। 23 फरवरी को बजट सत्र की शुरुआत राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के बजट भाषण से होगी।

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24 फरवरी को शोकोद्गार होगा। 26 फरवरी से राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होगी। तीन मार्च को गैर सरकारी सदस्य दिवस होगा। चार मार्च को जयराम सरकार अपने कार्यकाल का पांचवां बजट पेश करेगी। बजट अनुमान पर सामान्य चर्चा सात मार्च से शुरू होगी। इस चर्चा का समापन एवं मतदान 11 मार्च को होगा। वित्तीय वर्ष 2022-23 के इन बजट अनुमानों पर पक्ष और विपक्ष लंबी चर्चा करेंगे। 15 मार्च को यह बजट पारित होगा।
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कर्मचारियों का डीए बढ़ाने से अच्छा है बेरोजगारों को नौकरी दो
वहीं, प्रदेश में कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (डीए) बढ़ाने से अच्छा है कि बेरोजगारों को नौकरी दो। राज्य के बेरोजगारों ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को वित्तीय वर्ष 2022-23 के बजट के लिए ऐसे कई सुझाव दिए हैं। ये सुझाव हर वर्ष की तरह इस बार भी सरकार ने आम लोगों से मांगे हैं। सुझाव देने वालों में से किसी ने चौकीदारों के लिए नीति बनाने की मांग की है तो कोई आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए पॉलिसी की मांग कर रहा है। कोई सड़कों के लिए बजट मांग रहा है तो कोई कर्मचारी चयन आयोग के परीक्षा केंद्र मंडल स्तर पर स्थापित करने की भी मांग उठा रहा है।  मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इन सुझावों को देने की अपील दो फरवरी को ही की है। ये https://ebudget.hp.nic.in/bshp/ वेब पोर्टल पर मांगे जा रहे हैं। इन्हें 15 फरवरी तक दिया जा सकेगा। 
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सुझावों को मद्देनजर रखते हुए भी नया बजट तैयार किया जाएगा। इस वेब पोर्टल पर बेरोजगारों या कर्मचारियों के सुझाव ज्यादा आ रहे हैं। मसलन एक सुझाव यह आया है कि करुणामूलक आश्रितों को अपना क्रमिक अनशन शुरू किए 185 दिन हो गए हैं। इस बारे मेें एकमुश्त राहत दी जाए। एक अन्य सुझाव शास्त्री और भाषा अध्यापकों को अंग्रेजी के अध्यापकों के समान अधिकार या टीजीटी पदनाम देने का है। इसमें मांग की गई है कि जब योग्यता समान है तो पदनाम भी समान रूप से होना चाहिए। 


‘जिनके हाथ-पैर नहीं, उनका सोचो’ 
यह भी मांग की गई है कि जिस तरह अयोध्या में भाजपा सरकार ने राम मंदिर वनवास को समाप्त किया, उसी प्रकार से 35 वर्षों से टीजीटी पदनाम के लिए संघर्ष करने वाले शास्त्री का भी वनवास खत्म किया जाए। एक मांग यह भी है कि सभी लोग हाथ-पैर वाले हैं, मगर जिनके हाथ-पैर नहीं हैं और दिव्यांग हैं, सरकार को उनके लिए योजना बनानी चाहिए। 
 

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