{"_id":"56dfd1f64f1c1b351c8b4568","slug":"himachal-budget-announcements-depends-on-center-budget","type":"story","status":"publish","title_hn":"केंद्र की बैसाखी पर होगी विकास की दौड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केंद्र की बैसाखी पर होगी विकास की दौड़
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Wed, 09 Mar 2016 01:04 PM IST
विज्ञापन
सीएम वीरभद्र सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
‘यावत जीवेत् सुखं जीवेत्, ऋणं कृत्वा घृतं पीबेत्...’। यानी जब तक जीओ सुख से जीओ, कर्ज लो और घी पीओ। भौतिकवादी दार्शनिक आचार्य चार्वाक की यह पंक्ति हिमाचल के बजट पर सटीक बैठती है। अपने 19वें बजट में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने हर वर्ग को कुछ न कुछ देने की कोशिश की है। न कोई नया टैक्स लगाया, न ड्यूटी। लेकिन कर्ज में डूबे हिमाचल के संसाधन बढ़ाने की दिशा में बजट खामोश है।
विज्ञापन
ऐसे में करीब 4076 करोड़ के घाटे वाले इस बजट की घोषणाएं केंद्रीय अनुदान या ऋण के सहारे ही सिरे चढ़ सकेंगी। कुल बजट का 48.72 फीसदी हिस्सा केंद्रीय अनुदान से आएगा। यह केंद्रीय कर में प्रदेश की हिस्सेदारी से अतिरिक्त होगा। प्रदेश पर करीब 35000 करोड़ का कर्ज पहले से है। बजट की घोषणाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए सरकार को आगामी वित्त वर्ष में लगभग 7000 करोड़ रुपये का ऋण लेना पड़ सकता है।
विज्ञापन
करीब साढ़े तीन घंटे तक चले मुख्यमंत्री के बजट भाषण में चुनावी आहट भी सुनाई दी है। बेशक, विधानसभा चुनाव से पूर्व वर्ष 2017-18 का बजट भी पेश होगा, लेकिन इसी बजट की घोषणाएं अगले साल तक धरातल पर उतर पाएंगी। चुनाव में अहम भूमिका निभाने वाले सूबे के कर्मचारियों केलिए इस बार खास तौर पर बहुत उदारता से सरकारी खजाना खोला गया है।
विज्ञापन
डीए, अंतरिम राहत के अलावा अनुबंध कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए भी शर्तों में ढील दी गई। विभिन्न अस्थायी कर्मचारियों का मानदेय बढ़ा दिया गया। मोदी की तरह इस सरकार के बजट का फोकस भी गांवों पर है। इस बार ग्रामीण विकास के लिए 1549 करोड़ रुपये रखे हैं। पंचायतों और शहरी निकायों के प्रतिनिधियों का मानदेय भी बढ़ा दिया गया है।
किसानों-बागवानों और कारोबारियों का भी बजट में खास ख्याल रखा गया है। अगले वित्त वर्ष में 13000 पद भरने का एलान कर मुख्यमंत्री ने युवाओं को भी सरकारी नौकरी का सपना दिखाया है। यूनिवर्सल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम लाकर सरकार ने आम लोगों को स्वास्थ्य बीमा कवर दिया है। इसके अलावा कृषि-बागवानी के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। दिहाड़ी और सामाजिक सुरक्षा पेंशन बढ़ाकर सरकार ने अंतिम पंक्ति तक राहत के छींटे पहुंचाने का प्रयास किया है।
तोहफों से भर दी शिमला की झोली : जनारथा
मुख्यमंत्री ने शिमला की झोली सौगातों से भर दी है। शहर की हर समस्या और हर वर्ग का ख्याल रखा है। सीवरेज सिस्टम दुरुस्त करने का एलान किया है। पार्किंग के लिए दस करोड़ और युवाओं के लिए खेल मैदान को चार करोड़ दिए हैं। संजौली ढली बाईपास पर हैलीपेड, सर्कुलर रोड के विस्तार और नई सड़कों के निर्माण का एलान एतिहासिक कदम है।
निराश करने वाला है बजट: भारद्वाज
शिमला शहर के विधायक सुरेश भारद्वाज ने कहा कि बजट पूरी तरह से निराश करने वाला है। इसमें युवाओं, कारोबारी , कर्मचारियों और शहरी क्षेत्र के लोगों को कुछ नहीं दिया गया है। शिमला शहर के लिए पानी की कोई नई स्कीम नहीं और सीवेज को लेकर भी सरकार ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं की है। नगर निगम के तहत आने वाली सड़कों के रख रखाव के लिए चार करोड़ का बजट जरूर दिया है। उनकी ही मांग पर सर्कुलर रोड़ से वैकल्पिक सड़कें बनाने को भी मंजूरी दी गई है।