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बजट: नशे पर नकेल कसेगी सरकार, पांच नशा निवारण केंद्र खुलेंगे

Sun, 10 Feb 2019 11:50 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 10 Feb 2019 11:50 AM IST
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himachal budget 2019 announcement for security and eradication of drugs menace

पंजाब के बाद हिमाचल में बढ़ते नशे के कारोबार पर लगातार चिंतित जयराम सरकार ने अपने दूसरे बजट में खास तवज्जो दी है। बजट में नशे की तस्करी से लेकर उसके सेवन से बर्बाद हो रहे युवाओं को बचाने के अलावा भविष्य की रणनीति बनाने को लेकर कई एलान किए गए हैं।

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नशे के विरुद्घ अभियान को राज्य व्यापी जनांदोलन का रूप देते हुए सरकार इस साल युवा नव जीवन बोर्ड का गठन करेगी, जो मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में काम करेगा। इसमें सामाजिक कल्याण, पुलिस, युवा खेल, स्वास्थ्य, आबकारी एवं कराधान जैसे विभिन्न विभागों के सचिवों के अलावा विषय के जानकार और जनता के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
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यह बोर्ड युवाओं के  नशे से मुक्ति, पुनर्वास और मादक पदार्थों की तस्करी रोकने जैसे विषयों पर प्रभावी नीतियां बनाएगा और इनकी मानीटरिंग भी करेगा। वहीं, पुलिस के स्तर पर पहली बार प्रदेश में एक स्पेशल टास्क फोर्स गठित की जाएगी जिसका नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक स्तर का अधिकारी करेगा।
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इसी एसटीएफ के अधीन ही अब स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो भी काम करेगा। यह एसटीएफ तस्करों के खिलाफ रणनीतिक अभियानों के अलावा पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर एंटी नारकोटिक्स अभियान को प्रभावी तरीके से जमीन पर शुरू करेगा।

वहीं, साथ ही जम्मू-कश्मीर सीमा पर तैनात एसपीओ की सेवाओं और उनकी कठिनाईयों को देखते हुए मानदेय को 6,000 रुपये से बढ़ाकर 7 हजार रुपये कर दिया है। 

पांच नशा निवारण और पुनर्वास केंद्र होंगे स्थापित
सीएम जयराम ने एलान किया कि प्रदेश में जल्द ही पांच नशा निवारण एवं पुनर्वास केंद्र की स्थापना की जाएगी। इन केंद्र में प्रभावित व्यक्ति को उपचार के साथ साथ परामर्श सेवा भी मुहैया कराई जाएगी। इसके अलावा तीन परिवार न्यायालय भी स्थापित किए जाएंगे।

तीसरी आंख की निगरानी में होगी 941 किलोमीटर की सीमा

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मुख्यमंत्री जयराम ने अपने बजट में एलान किया है कि दूसरे प्रदेश से लगती सीमाओं की तीसरी आंख से निगरानी की जाएगी। इसके लिए 150 उन अतिसंवेदनशील स्थानों को चिह्नित कर हाई रेजोल्यूशन वाले  अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे जहां मादक पदार्थों, वन संपदा व अन्य तरही की तस्करी होने की संभावना सबसे ज्यादा रहती है। वहीं, नशे की तस्करी रोकने और प्रभावी तरह से नजर रखते व कार्रवाई करने के लिए हर पुलिस जिले में आधुनिक तकनीक से लैस टेक्निकल सेल गठित होंगे।  

अब रिपोर्टिंग चौकियों पर भी दर्ज कराएं अपनी एफआईआर
शिमला। हिमाचल की भौगोलिक स्थिति और पहुंच बनाने में हो रही मुश्किलों के बीच जयराम सरकार ने लोगों की सुविधा के लिए बड़ा एलान किया है। इसके तहत पुलिस थानों के साथ साथ अब क्षेत्र की पुलिस चौकी में भी लोग अपनी प्राथमिकी दर्ज करा सकेंगे। जयराम सरकार सूबे की सौ पुलिस चौकियों को रिपोर्टिंग चौकी बनाएगी ताकि इन चौकियों के आसपास के लोगों को कई किलोमीटर दूर थानों तक सिर्फ अपनी प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए नहीं जाना पड़ेगा। सरकार के इस फैसले से न सिर्फ लोगों की मेहनत बचेगी बल्कि थाने आने जाने में होने वाले वित्तीय बोझ भी खत्म हो जाएगा।

मुख्य आरक्षी भी करेंगे आबकारी अधिनियम मामलों की जांच

जांच अधिकारियों की कमी की वजह से जांच प्रभावित हो रही थी। जांचों में होने वाली देरी और जांच अधिकारियों पर पड़ रहे बोझ को कम करते हुए प्रदेश सरकार ने मुख्य आरक्षियों को जांच में भी भागीदार बनाने का फैसला लिया है। जयराम सरकार ने इस संबंध में बड़ा कदम उठाने का फैसला लिया है। इसके तहत कानून में संशोधन कर आबकारी अधिनियम 2011 के तहत दर्ज मामलों की जांच मुख्य आरक्षियों को भी अधिकृत करेगी। इसके अलावा स्नातक आरक्षियों को तीन साल या उससे कम सजा वाले अपराध से जुड़े या केवल जुर्माने वाले मामलों की जांच के लिए प्राधिकृत किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे जांच अधिकारियों का बोझ कम होगा और वह जघन्य अपराधों की जांच को प्रभावी तरीके से पूरा कर पाएंगे।

तकनीक का होगा ज्यादा इस्तेमाल
बजट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि जांच में तकनीक का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जाए। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदेश भर में फोरेंसिक नेटवर्क में सुधार करने की बात कही। एलान किया उत्तरी रेंज के रूपपुर और दक्षिणी रेंज के पुलिस जिला बद्दी में एक एक जिला मोबाइल फोरेंसिक यूनिट स्थापित की जाएगी।

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