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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Himachal Assembly Session: Outsourced Employees Are Not Govt Staff; No Plans to Formulate a Long Term Policy

हिमाचल विधानसभा सत्र: आउटसोर्स कर्मचारी सरकारी नहीं, दीर्घकालिक नीति बनाने का विचार नहीं

Wed, 01 Apr 2026 09:32 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 01 Apr 2026 09:32 PM IST
सार

आउटसोर्स कर्मचारी सरकार के कर्मचारी नहीं हैं, इसलिए सरकार का जॉब सिक्योरिटी व दीर्घकालिक संविदा नीति बनाने का कोई विचार नहीं है। मुख्यमंत्री की ओर से यह जानकारी प्रकाश राणा के प्रश्न के उत्तर में सदन के पटल पर रखी गई। 
 

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Himachal Assembly Session: Outsourced Employees Are Not Govt Staff; No Plans to Formulate a Long Term Policy
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आउटसोर्स कर्मचारी सरकार के कर्मचारी नहीं हैं, इसलिए सरकार का जॉब सिक्योरिटी व दीर्घकालिक संविदा नीति बनाने का कोई विचार नहीं है। वित्त विभाग की ओर से जारी किए गए पॉलिसी दिशा-निर्देश के अनुसार 1 जुलाई 2017 के अनुसार आउटसोर्स आधार पर नियुक्त कर्मचारियों के पारिश्रमिक और अन्य सुविधाओं के नियम तय हैं। 7 तारीख के बाद किसी कर्मचारी का वेतन रोके जाने का मामला सरकार के संज्ञान में नहीं है। मुख्यमंत्री की ओर से यह जानकारी प्रकाश राणा के प्रश्न के उत्तर में सदन के पटल पर रखी गई। 

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सरकार पर 1,01863 करोड़ रुपये का कुल बकाया ऋण
राज्य सरकार ने पिछले तीन वर्षों में 31 जनवरी 2026 तक ऋण व ब्याज अदायगी पर 26,256 करोड़ खर्च किए हैं। इस अविध में सरकार ने सामान्य भविष्य निधि में उपार्जित शुद्ध राशि सहित कुल 35,555 करोड़ रुपये के ऋण लिए। वर्तमान में प्रदेश सरकार पर 31 मई 2026 को 1,01863 करोड़ रुपये का कुल बकाया ऋण है। 31 जनवरी 2026 तक पिछले वित्त वर्ष में 8,269 करोड़ रुपये खुले बाजार से कर्ज उठाया गया। 550 करोड़ रुपये नाबार्ड, 117 करोड़ बाह्य परियोजनाओं के तहत और 2,428 करोड़ रुपये भारत सरकार से ब्याज रहित कर्ज लिया गया। कुल 11,364 करोड़ रुपये कर्ज लिया गया। सामान्य भविष्य निधि से उपार्जित 262 करोड़ रुपये घटाए जाएं तो 11,102 करोड़ कर्ज लिया गया। मुख्यमंत्री ने यह जानकारी प्रकाश राणा व अन्य भाजपा विधायकों के प्रश्न के उत्तर में सदन के पटल पर रखी। बिजली बोर्ड पर 3,390.77 घाटा, परिवहन निगम पर 2,272.24 करोड़ घाटा, पॉवर कारपोरेशन पर 976.03 कराेड़ घाटा, पर्यटन निगम पर 147.45 करोड़ घाटा है। कई अन्य संस्थान घाटे में चल रहे हैं।

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