Himachal Assembly: सदन में बोलने का मौका नहीं देने पर विपक्ष का वाकआउट, राज्यपाल से मिले नेता प्रतिपक्ष
प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पांचवें दिन की बैठक की शुरुआत सोमवार 2:00 बजे विपक्ष के हंगामे के साथ शुरू हुई।
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पांचवें दिन की बैठक की शुरुआत सोमवार 2:00 बजे विपक्ष के हंगामे के साथ शुरू हुई। बोलने का मौका नहीं देने पर विपक्ष से सदन से वाकआउट कर दिया। अध्यक्ष के व्यवहार से नाराज विपक्षी सदस्य सदन छोड़कर सीधे राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल से मिलने राजभवन पहुंच गए। सोमवार को विपक्ष ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए प्रश्नकाल की कार्यवाही से पहले कुछ कहने की मंजूरी मांगी। भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार बार-बार अपनी बात रखने का प्रयास करने लगे, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने उन्हें अनुमति नहीं दी। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सदन की कार्यवाही को आगे बढ़ाते हुए सीधे प्रश्नकाल शुरू कर दिया। इसके बाद सत्ता पक्ष के विधायक विपक्ष के हंगामे के बीच मंत्रियों से प्रश्न करते रहे। विधानसभा अध्यक्ष ने भाजपा विधायकों के प्रश्नकाल में भाग न लेने पर उन्हें गैर हाजिर मानते हुए सदन की कार्यवाही को आगे बढ़ाया। करीब सवा 2:00 बजे विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए सदन से वाकआउट कर दिया। इसके बाद प्रश्नकाल विपक्ष की गैर हाजिरी में ही चलता रहा। इसके बाद विपक्ष के सदस्य राजभवन चले गए।
विधानसभा अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए सौंपा प्रस्ताव
इससे पहले सोमवार सुबह भाजपा विधायक दल ने बैठक कर विधानसभा अध्यक्ष के व्यवहार को लेकर चर्चा की। इसके बाद करीब डेढ़ बजे विपक्ष ने नियम 274 के तहत विधानसभा सचिव को प्रस्ताव सौंपकर अध्यक्ष को पद से हटाने की मांग की। इससे पहले करीब 12:30 बजे विपक्ष ने नियम 67 के तहत वित्तीय स्थिति पर चर्चा करने के लिए स्थगन प्रस्ताव लाने का विधानसभा सचिवालय को प्रस्ताव दिया था। सदन के भीतर आने पर विपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष से बोलने का मौका मांगा लेकिन अध्यक्ष ने प्रश्नकाल के मामला बात रखने की व्यवस्था दी। इसको लेकर विपक्ष के सदस्य बिफर उठे और नारेबाजी करने लगे। विपक्ष इस दौरान किस मुद्दे को उठाना चाहता था, यह स्पष्ट नहीं हो सका। काफी देर हंगामा करने के बाद सदन से वाकआउट कर बाहर चले गए। सदन से बाहर आकर विपक्ष ने अध्यक्ष के खिलाफ गुबार निकाला। नियम 274 और नियम 67 के तहत चर्चा नहीं होने को लेकर अपनी नाराजागी जताई।
नियमों के अनुसार ही चलेगी कार्यवाही : पठानिया
विपक्षी सदस्यों के सदन से बाहर जाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि उनका यह प्रयास रहता है कि जो भी मुद्दे जनता से संबंधित हो, वे चर्चा में लाए जाए। सारे मामले जो सूचीबद्ध हैं, वे विपक्ष के संबंध में ही ज्यादा हैं। जो भी कार्यवाही होगी, वह नियमों के अनुसार ही होगी। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि विपक्ष ने नियम 67 से जुड़ी स्थगन प्रस्ताव की सूचना दी। कर्मचारियों और पेंशनरों के समय पर वेतन व पेंशन न देन से यह संबंधित है। नियम 130 में इसी प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है, जो वित्तीय स्थिति से संबंधित है। इस स्थगन प्रस्ताव पर अविलंब चर्चा को करवाने का कोई औचित्य नहीं रह जाता है, जिन्होंने सदन में यह प्रस्ताव लाया है, वे भी यहां नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे विपक्ष में गंभीरता का न होना दिखता है। नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेवारी बहुत ज्यादा है। वह पिछले पांच साल तक मुख्यमंत्री भी रहे हैं।
यह विपक्ष का दिवालियापन कि इनके पास कोई मुद्दा नहीं : हर्षवर्धन
संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि विपक्ष के सदस्य नियम-67 के तहत नोटिस दे रहे हैं। प्रश्नकाल में मुद्दा कुछ और उठाया जा रहा है। इससे स्पष्ट है कि विपक्ष नियमों को लेकर भी गंभीर नहीं है। यह विपक्ष का दिवालियापन है कि इनके पास कोई मुद्दा नहीं है। अध्यक्ष से संबंधित जो मुद्दा इन्होंने उठाने का प्रयास किया, वह नियमानुसार सही नहीं है। आज आपदा पर एजेंडा नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने दिया था। कानून-व्यवस्था भी इनका मुद्दा रहा है। दस में से आठ मुद्दे भाजपा नेताओं के लगे हैं। नियम- 67 का भी एक प्रस्ताव दिया गया है। उस पर इन्होंने कुछ कहा तक नहीं। मंत्री ने कहा कि कांग्रेस विधायकों ने भी नियम 130 में वित्तीय स्थिति पर मुद्दा दिया है। सरकार की ओर से दिए प्रस्तावों से ज्यादा विपक्ष को अवसर मिल रहा है। इसके बावजूद विपक्ष का व्यवहार सही नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के सदस्य विधानसभा अध्यक्ष को डिक्टेट नहीं कर सकते कि सदन कैसे चलाना है। हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि पिछले कल नेता विपक्ष जयराम ठाकुर से उन्होंने टेलीफोन पर बात की। उन्हें कहा कि सत्र दस दिन का है पर यह लोग भाग रहे हैं। आज ये सदन से बाहर चले गए। यह समय की बर्बादी है। इस सदन को चलाने की जिम्मेवारी केवल सरकार की ही नहीं है, विपक्ष की भी है। सरकार इतनी कमजोर नहीं है। सरकार ने कुछ भी गलत नहीं किया है।
विपक्ष में चल रही आपस की लड़ाई, इसलिए ये तनाव में हैं : सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि विपक्ष में आपस की लड़ाई चल रही है। इसलिए ये तनाव में हैं। सदन के समय को खराब किया जा रहा है। प्रश्नकाल जरूरी होता है, इसमें प्रदेश भर से जुड़े सवाल होते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने प्रश्नकाल से पहले ड्रोन की जासूसी वाले व्यवस्था के प्रश्न पर पहले नेता विपक्ष जयराम ठाकुर को बोलने का मौका दिया। कई बार इन्हें अवसर दिए गए। जिस राजनीतिक मंशा से ये लोग मुद्दे उठा रहे हैं, प्रदेश की जनता सब जानती है। कानून-व्यवस्था और वित्तीय स्थिति पर भी सरकार चर्चा करने को तैयार है, लेकिन लगता है कि विपक्ष इसको लेकर गंभीर नहीं है। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि विपक्ष को यह भी मालूम नहीं है कि महत्वपूर्ण क्या है और क्या नहीं। नियम 67 बहुत जरूरी होने पर ही लाए जाते हैं। प्रश्नकाल से पहले यह प्रस्ताव लाने से स्पष्ट है कि यह सिर्फ शोशे के लिए चर्चा लाए थे। जब नियम 67 का नोटिस दिया होता है कि अन्य चर्चा नहीं होती।
अध्यक्ष का व्यवहार बर्दाश्त करने योग्य नहीं : जयराम
सदन से वॉकआउट करने के बाद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान नेता विपक्ष ने कहा कि सोमवार दोपहर को भाजपा विधायक दल ने नियम 274 के तहत सचिव को प्रस्ताव सौंपकर अध्यक्ष को पद से हटाने की मांग की। नियम अनुसार जब ऐसा प्रस्ताव देते हैं तो अध्यक्ष आसन छोड़ देते हैं, सदन का संचालन नहीं करते। अध्यक्ष स्वयं को नियम के मामले में सदन से ऊपर मानते हैं। ज्ञान के मामले में तो उन्हें लगता है कि किसी को भी ज्ञान नहीं है। सोमवार को पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने नियमों का हवाला देकर बात रखने की कोशिश की तो उन्हें मंजूरी नहीं दी। हो सकता है कि बात सुनी जाती तो मामला सुलझ जाता।
विपक्ष ने दूसरा नोटिस नियम 67 के तहत स्थगन प्रस्ताव का दिया था। इसके तहत प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर चर्चा करना चाहते थे। वेतन व पेंशन जारी नहीं होने से स्पष्ट है कि प्रदेश आर्थिक संकट में है। इसको लेकर भी अध्यक्ष ने बोलने नहीं दिया। विपक्ष के किसी भी नोटिस को अध्यक्ष ने मंजूरी नहीं किया। इसके चलते वाकआउट किया गया। जयराम ठाकुर ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष का व्यवहार विपक्ष के प्रति हैरान करने वाला है। शुक्रवार को छोटी सी बात हुई थी, विधायक लखनपाल ने उपचुनाव के समय अध्यक्ष की ओर से दिए गए बयान का हवाला देते हुए खेद व्यक्त करने को कहा था।