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एक तीर से दो निशाने साधना चाह रहीं वरिष्ठ मंत्री विद्या स्टोक्स, ये किस्सा है दिलचस्प

Thu, 12 Oct 2017 02:06 PM IST
सुरेश शांडिल्य/अमर उजाला, शिमला
सुरेश शांडिल्य/अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 12 Oct 2017 02:06 PM IST
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himachal assembly election IPH minister vidya stokes interview

अपनी सीट मुख्यमंत्री को तोहफे में देकर हिमाचल सरकार की वरिष्ठ मंत्री विद्या स्टोक्स एक तीर से दो निशाने साधना चाह रही हैं। एक तरफ जहां स्टोक्स सीएम वीरभद्र सिंह को ठियोग से चुनाव लड़ने का न्योता देकर उन्हें खुश करना चाहती हैं, दूसरी तरफ वे अपने विरोधी पूर्व विधायक राकेश वर्मा की राजनीतिक तबाही की भी रणनीति बना रही हैं।

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इस रणनीति में कोई भी चुनाव हारे, जीत केवल विद्या स्टोक्स की होगी। किस्सा दिलचस्प है। वर्ष 1993 में पहली बार राकेश वर्मा ने भाजपा का टिकट लेकर ठियोग में विद्या स्टोक्स को विधानसभा चुनाव में हराया था। तब वर्मा ने खुद को धरतीपुत्र करार दिया था क्योंकि स्टोक्स कोटगढ़ की मूल निवासी थीं ठियोग की नहीं।
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इसकी टीस स्टोक्स के जुबान पर अब तक है। वर्मा परिवार वीरभद्र का भी करीबी रहा है। भाजपा अगर वर्मा को टिकट देती है तो इस सीट पर मुकाबला कांटे का होगा। सूत्रों की मानें तो अब स्टोक्स इस नई रणनीति से इस परिवार से पुराना बदला भी चुकाना चाहती हैं। स्टोक्स 90 साल की उम्र पार करने वाली हैं।
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पिछले कुछ दिनों तक स्टोक्स यही कहती रहीं कि वे ठियोग से विधानसभा चुनाव आगे भी लड़ने जा रही हैं, लेकिन उन्होंने नए तेवर दिखाए हैं। तीन बार ठियोग से एमएलए बन चुके राकेश वर्मा चाहे भाजपा में रहे हों या फिर दो बार दो निर्दलीय विधायक ही रहे हों,

उनके पारिवारिक संबंध वर्ष 2012 तक वीरभद्र के साथ अच्छे ही रहे हैं। पिछले चुनाव में धूमल समेत अन्य भाजपा नेताओं से मजबूत रिश्ते बनाकर उन्होंने दोबारा भाजपा का टिकट लेकर फिर ठियोग से स्टोक्स के खिलाफ चुनाव लड़ा।

राजनीतिक खात्मे के लिए नया दांव

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ठियोग के पूर्व विधायक राकेश वर्मा - फोटो : File Photo

करीब दो दशक की तनातनी के बाद स्टोक्स का वीरभद्र से संबंधों में सुधार हुआ। इसका नतीजा ये निकला कि वीरभद्र के सहयोग से स्टोक्स ठियोग में वर्मा को हराने में कामयाब हुईं। अब स्टोक्स ने दोबारा राकेश वर्मा के राजनीतिक खात्मे के लिए नया दांव खेला है।

हालांकि, बुधवार को दिन भर स्टोक्स इस बात को स्वीकार करती रहीं कि उन्होंने सीएम को ठियोग से चुनाव लड़ने को कहा है। लेकिन शाम तक कांग्रेस का दूसरा खेमा भी सक्रिय हो गया। उन्होंने स्टोक्स पर दबाव बनाया कि वे सीट छोड़ने का खुलेआम प्रचार न करें।

इसके बाद शाम के वक्त स्टोक्स बोलीं कि अभी उन्होंने ठियोग सीट पर कोई आखिरी फैसला नहीं लिया है। उधर सीएम वीरभद्र सिंह भी शतरंज के मोहरे बिछा रहे हैं। उन्होंने अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

वे खुद कह रहे हैं कि उनके पास ठियोग के अलावा अर्की विधानसभा क्षेत्र भी दूसरा विकल्प हो सकता है। इसलिए उन्होंने इस ऑफर पर अपना रुख अभी साफ नहीं किया है।

वीरभद्र क्या राहुल के खिलाफ भी लड़ूंगा चुनाव: राकेश वर्मा 
ठियोग के पूर्व विधायक राकेश वर्मा ने कहा वीरभद्र ही क्यों, अगर भाजपा राहुल गांधी से भी चुनाव लड़ने का आदेश देगी, तो मैं चुनाव लडू़ंगा। पार्टी का चुनाव लड़ने का या अन्य तरह से सेवा करने का जो भी आदेश होगा, वह मंजूर है।

भारतीय जनता पार्टी 75 साल में रिटायर कर देती है, मगर कांग्रेस पार्टी उम्मीदवारों की शुरुआत ही 84 साल की उम्र में करती है। इससे बड़ा मजाक और क्या होगा। कांग्रेस डूबती नाव है, जो इतिहास की तरफ जा रही है। सीएम तो शिमला में तारकोल बिछाने के भी शिलान्यास कर रहे हैं।

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