फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   himachal assembly election big leader become the power and weakness of the two parties

विस चुनाव, ये दिग्गज ही बन गए दोनों दलों की ताकत और कमजोरी

Sun, 15 Oct 2017 12:56 PM IST
अरुणेश पठानिया अमर उजाला, शिमला
अरुणेश पठानिया अमर उजाला, शिमला Updated Sun, 15 Oct 2017 12:56 PM IST
विज्ञापन
himachal assembly election big leader become the power and weakness of the two parties

हिमाचल में हैवीवेट नेताओं से लेस भाजपा और कांग्रेस की जो ताकत है, वही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी मानी जा रही है। इस बार बगैर चेहरे के समर में उतरी भाजपा के लिए तीन बड़े चेहरों प्रेम कुमार धूमल, जेपी नड्डा और शांता कुमार के साथ दूसरी पंक्ति के नेताओं को भी तरजीह देनी है। 

विज्ञापन


मगर भाजपा की कोशिशों में चेहरे और मोहरे दोनों को लेकर कन्फ्यूजन है। कांग्रेस में शुरू से अंत तक तस्वीर एकदम साफ है कि उसके इलेक्शन कैंपेन और सीएम का चेहरा कौन होगा। 
विज्ञापन


हालांकि, ऐसा भी नहीं है कि वीरभद्र को कमान मिलने से विरोधी खेमे ने हथियार डाल दिए हैं, टिकट आवंटन तय करेगा कि कांग्रेस की रणनीति कितनी कारगर साबित हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कई दिग्गज चेहरे होने के बावजूद भाजपा ने सीएम का चेहरा नहीं देकर साफ किया है कि किसी एक नाम पर मुहर लगाने से घमासान मच सकता है। पार्टी क्षत्रपों के भरोसे प्रचार नहीं चलाना चाहती बल्कि इन्हें प्रचार अभियान का सिर्फ एक हिस्सा बनाना चाहती है। 

सबसे बड़े जिले कांगड़ा से पार्टी का चेहरा सांसद शांता कुमार हैं, लेकिन 1998 से शांता प्रदेश की सियासत छोड़ केंद्र की राजनीति का हिस्सा रहे हैं। कांगड़ा के दुर्ग में दो दशकों में प्रेम कुमार धूमल के कई विश्वस्त मजबूत हो चुके हैं। 

वर्ष 2012 में पार्टी की कांगड़ा में हार की बड़ी वजह शांता और धूमल में मतभेद माने जाते हैं। भले इस चुनाव में कांगड़ा को लेकर शांता की राय को केंद्रीय नेतृत्व तरजीह दे रहा है, लेकिन एकाएक धूमल की अनदेखी का जोखिम भी नहीं ले सकता।

तो पार्टी में बढ़ सकती है टकराव की स्थिति

himachal assembly election big leader become the power and weakness of the two parties
खुद धूमल के गृह क्षेत्र हमीरपुर में उनके लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा का दखल बताया जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती की भूमिका इन दिग्गजों के बीच गौण होती दिख रही है। एम्स में नड्डा और धूमल परिवार में खींचतान पार्टी के लिए सबक है। 

अगर पार्टी तीनों में से किसी एक को तरजीह देती है तो टकराव की आशंका बढ़ जाएगी। मंडी में सांसद राम स्वरूप शर्मा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जयराम ठाकुर, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गुलाब सिंह में तालमेल बैठाना होगा। शिमला-सोलन में भी भाजपा के लिए स्थितियां आसान नहीं हैं। 

सोलन से सिरमौर पलायन कर चुके राजीव बिंदल की रुचि अब भी यहीं है। शिमला नगर निगम चुनाव में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेश भारद्वाज और बिंदल में प्रतिस्पर्धा इसका एक नमूना है। ऐसे में क्षत्रपों से किसी एक को मिली तरजीह या अलग-अलग जिम्मेदारी बांटने पर भी टकराव होने की आशंका बनी रहेगी।

कांग्रेस में बदल रहे समीकरण

himachal assembly election big leader become the power and weakness of the two parties

कांग्रेस में दिग्गजों के नाम पर सीएम वीरभद्र सिंह का चेहरा ही अब तक सामने है, जिससे पार्टी में टकराव कम है। पिछले पांच साल में अंदरखाने जंग चलती रही। वीरभद्र सिंह के 6 बार मुख्यमंत्री रहने के बाद सातवीं बार भी कमान सौंपने को पार्टी तैयार है।

वीरभद्र की धुर विरोधी विद्या स्टोक्स अब उनकी धुरी पर घूम रही हैं। स्टोक्स के वीरभद्र को अपनी सीट देने से विरोधी खेमे को बड़ा झटका लगा है। प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू हाईकमान से वीरभद्र को कमान देने के फैसले के बाद शांत हैं।

कांगड़ा से धुरंधर जीएस बाली भले खुलकर वीरभद्र पर हमला नहीं करते, लेकिन स्टोक्स का जाना उनके कुनबे को कमजोर कर रहा है। मंडी से कांग्रेस दिग्गज ठाकुर कौल सिंह भी हाईकमान की भाषा बोलने लगे हैं। हाईकमान का वीरभद्र को सीएम उम्म्ीदवार घोषित करने का दांव फिलहाल कामयाब दिख रहा है,

लेकिन टिकट आवंटन में दिग्गजों के अहं टकरा सकते हैं। वीरभद्र सिंह बेटे विक्रमादित्य का टिकट फाइनल करवाएंगे तो दूसरे दिग्गज भी अपने पुत्र-पुत्रियों के लिए दबाव बनाएंगे। बाली अपने बेटे रघुवीर सिंह बाली के लिए लॉबिंग करेंगे।

मंडी में बदली सियासत

himachal assembly election big leader become the power and weakness of the two parties

पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम के परिवार की भाजपा में एंट्री होने से जिला मंडी में राजनीतिक समीकरण बदल जाएंगे। मंडी जिला में सुखराम का खासा दबदबा माना जाता है।  सुखराम के बेटे अनिल शर्मा का भाजपा में शामिल होना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है।

कांग्रेस की चुनाव संचालन, प्रबंधन आदि को लेकर घोषित आधा दर्जन कमेटियों में तमाम नेताओं को एडजस्ट किया गया है, लेकिन कैबिनेट मंत्री अनिल शर्मा किसी कमेटी का हिस्सा नहीं थे। सुखराम के वीरभद्र से बहुत अच्छे संबंध नहीं  रहे।

उन्होंने ही साल 1998 में हिमाचल विकास कांग्रेस का गठन कर प्रदेश में तीसरे मोर्चे का विकल्प दिया। साल 1998  में पंडित सुखराम की हिविका के सहयोग से प्देश में भाजपा की सरकार बनी थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed