हिमाचल विस चुनाव: ताउम्र रहे धुर विरोधी, अब एक धुरी पर लौटे
सियासत में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता है। हिमाचल की सियासत में यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है। कई दशकों तक कांग्रेस में धुर विरोधी रहे वीरभद्र सिंह और विद्या स्टोक्स अब एक हो गए हैं। छह बार के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की मुखालफत करने वाली विद्या ने चुनावों को गुडबाय कर दिया।
सबसे रोचक ये है कि ठियोग की अपनी सीट पर कोई उत्तराधिकारी देने के बजाय वीरभद्र सिंह को आमंत्रित किया है। अर्की से चुनाव लड़ने की सोच रहे वीरभद्र को विद्या का ऑफर बेहतर लगा। अब वे वहीं से चुनाव लड़ने जा रहे हैं।
प्रदेश में कांग्रेस की सियासत में वीरभद्र सिंह के यूं तो कई विरोधी पार्टी में हैं, लेकिन खुलकर मोर्चा खोलने वालों में विद्या स्टोक्स का नाम सबसे ऊपर माना जाता है। हमेशा हाईकमान की करीबी रहीं स्टोक्स तमाम कोशिशों के बावजूद मुख्यमंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाईं।
दशकों तक वीरभद्र की खिलाफत करती रहीं विद्या
प्रदेश की सियासत में विद्या नंबर टू ही रहीं। वर्ष 2012 में विद्या ने वीरभद्र से रिश्तों पर जमी बर्फ को तोड़ने की कोशिश की। वीरभद्र के मुख्यमंत्री बनने में विद्या ने कोई अड़चन नहीं पैदा की, बल्कि उनका समर्थन ही किया। बीते पांच साल में दोनों के बीच खट्टा मीठा रिश्ता रहा।
वीरभद्र विरोधी खेमा लगातार स्टोक्स के संपर्क में रहा। एक सप्ताह पहले स्टोक्स ने पारिवारिक दबाव और बढ़ती उम्र के कारण चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय लिया तो ये कयास लगने लगे कि उनका कोई उत्तराधिकारी आएगा।
लेकिन हुआ इससे विपरीत स्टोक्स ने वीरभद्र को ठियोग से लड़ने का निमंत्रण दिया। विरोधी खेमा उनसे मिला, लेकिन वे अपने फैसले पर डटी रहीं। इतना ही नहीं, हाईकमान को पत्र लिखकर अपने करीबियों को झटका दे दिया।
जिला शिमला की चौथी सीट से लड़ेंगे सीएम
ठियोग विधानसभा से चुनाव लड़कर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह जिला शिमला की चौथी सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगे। वीरभद्र सिंह ने पहली बार अक्तूबर 1983 में जुब्बल कोटखाई सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा था। तत्कालीन मुख्यमंत्री रामलाल ठाकुर के पद छोड़ने के बाद वीरभद्र सिंह ने इस सीट से उपचुनाव में जीत दर्ज की।
साल 1985 के चुनाव में इसी सीट से उन्होंने दोबारा जीत दर्ज की। जुब्बल कोटखाई के बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने रोहड़ू से चुनाव लड़ा। साल 1990, 1993, 1998 और 2003 तक वीरभद्र सिंह ने रोहड़ू से चुनाव लड़ा।
साल 2012 में पुनर्सीमांकन के चलते वीरभद्र सिंह ने नई सीट बनी शिमला ग्रामीण से चुनावी पारी शुरू की। शिमला ग्रामीण से चुनाव जीतकर वीरभद्र सिंह छठी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। अब 2017 के चुनाव में वीरभद्र सिंह ठियोग सीट से चुनाव लड़ने जा रहे हैं।