'एल्पस पर तिरंगा फहराकर मुझे नाज है खुद पर'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
'आई अचीवड द गोल। एल्पस पर तिरंगा फहराकर मुझे खुद पर नाज है। माता पिता की शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझे इस मुकाम तक पहुंचाया। टीम के सभी मेंबर्स को स्पॉन्सर मिल गए थे। लेकिन मुझे कोई स्पॉन्सर करने वाला नहीं मिला। मम्मी डैडी ने मेरी हौंसला अफजाई की। कहा, बेटी तेरे सपनों को कभी टूटने नहीं देंगे। उन्होंने लोन लेकर मुझे एल्पस फतह करने भेजा।'
ये अल्फाज हैं हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के सुल्याली गांव की आकृति हीर के। 20 वर्ष की उम्र में यूरोप की सबसे ऊंची और दुनिया की दूसरे नंबर की एल्पस चोटी को फतह कर आकृति न सिर्फ पहली, बल्कि देश की सबसे कम उम्र की पर्वतारोही भी बन गई हैं। नूरपुर के सुल्याली पंचायत की आकृति हीर ने यह कारनामा कर दिखाया है।
भारतीय समय के अनुसार वीरवार दोपहर करीब डेढ़ बजे आकृति ले एल्पस चोटी पर तिरंगा फहराया। इसके बाद उन्होंने सेटेलाइट से इसकी सूचना परिजनों को दी। आकृति की इस कामयाबी पर उनके पैतृक गांव सुल्याली में खुशी की लहर दौड़ गई है।
गंगोत्री की चोटी को कर चुकी है फतह
इससे पहले आकृति हीर उत्तरकाशी (उत्तराखंड) में करीब 16 हजार फीट
ऊंची गंगोत्री चोटी को भी फतह कर चुकी हैं। इसके लिए उन्हें एवरेस्ट फतह
करने वाली प्रथम महिला पर्वतारोही बिछेंद्री पाल सम्मानित भी कर चुकी हैं।
वर्तमान
में आकृति पठानकोट (पंजाब) के एक निजी संस्थान से बीसीए कर रही हैं।
उन्होंने अपनी दसवीं तक पढ़ाई सुल्याली गांव के विवेकानंद पब्लिक स्कूल तथा
जमा दो तक की पढ़ाई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सुल्याली से की है।
19 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आकृति समेत चार सदस्यीय दल को राष्ट्रीय ध्वज देकर दिल्ली से इस मिशन के लिए रवाना किया था। छह दिन के कड़े संघर्ष के बाद आकृति और उनके साथियों ने एल्पस चोटी पर तिरंगा फहराया।