प्रिंसिपलों की लापरवाही से 861 शिक्षकों की नौकरी पर खतरा
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प्रिंसिपलों की लापरवाही से प्रदेश के निजी और सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले 861 अप्रशिक्षित शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ गई है। डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन के लिए नामांकन करवा चुके इन शिक्षकों की निर्धारित तारीख तक स्कूल प्रिंसिपलों ने सत्यापन नहीं किया है।
30 नवंबर सत्यापन की आखिरी तारीख थी। स्कूल प्रिंसिपलों को सत्यापन करने के लिए निदेशालय ने कई बार आगाह किया था, बावजूद इसके लापरवाही बरती गई। अगर एनआईओएस ने सत्यापन की तारीख नहीं बढ़ाई तो 861 अप्रशिक्षित शिक्षकों की मार्च 2019 में सरकारी सेवाओं से छुट्टी हो जाएगी।
स्कूल प्रिंसिपलों को ऑनलाइन ही सत्यापन करना है। प्राइमरी कक्षाएं पढ़ाने के लिए केंद्र सरकार डीएलएड करना अनिवार्य किया है। 31 मार्च 2019 के बाद सरकारी और निजी स्कूलों में डीएलएड किए बिना कोई भी शिक्षक प्राथमिक कक्षाओं को नहीं पढ़ा सकेगा।
नौ दिनों में 827 का सत्यापन
केंद्र सरकार ने डीएलएड के प्रति शिक्षकों को जागरूक करने के लिए बीते कई माह से मुहिम चलाई हुई है। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश से 10072 अप्रशिक्षित शिक्षकों ने डीएलएड के लिए अपना ऑनलाइन पंजीकरण करवाया है।
डीएलएड करने के लिए स्कूल प्रिंसिपलों द्वारा सत्यापन करना जरूरी है लेकिन 861 शिक्षकों का अभी तक सत्यापन नहीं हुआ है। केंद्र सरकार की ओर से हिमाचल सरकार को जारी पत्र में इसका खुलासा हुआ है।
21 नवंबर को शिक्षा निदेशालय को 1688 प्रशिक्षित शिक्षकों के सत्यापन नहीं करने पर स्कूल प्रिंसिपलों को आखिरी चेतावनी जारी की गई थी।
निदेशालय की सख्ती के बाद 1688 में से 827 शिक्षकों का सत्यापन कर दिया गया लेकिन 861 शिक्षकों का सत्यापन अभी भी नहीं हुआ है। 21 नवंबर की चेतावनी से पहले भी प्रिंसिपलों को कई बार सत्यापन जल्द करने के आदेश दिए गए थे।