Himachal News: प्रदेश के शहरी निकायों में सोलह नामांकन रद्द, उम्मीदवार कल ले सकेंगे नाम वापस; जानें विस्तार से
हिमाचल प्रदेश में 51 शहरी निकायों में चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन प्रक्रिया के तहत 6 मई को नामांकन वापसी का दिन तय किया गया है। इसी दिन यह स्पष्ट हो जाएगा कि अंतिम रूप से कितने उम्मीदवार चुनावी मैदान में रहेंगे। पढ़ें पूरी खबर...
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हिमाचल प्रदेश के 51 शहरी निकायों में चुनाव को लेकर नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद जांच के दौरान 16 उम्मीदवारों के नामांकन रद्द कर दिए गए हैं। निकायों में 449 पार्षद पदों के लिए कुल 1,426 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किए थे। जिला कुल्लू और जिला सिरमौर में नामांकन की छंटनी का काम पूरा नहीं हो पाया है। मंगलवार तक दोनों जिलों की स्थिति साफ हो पाएगी।
राज्य निर्वाचन प्रक्रिया के तहत 6 मई को नामांकन वापसी का दिन तय किया गया है। इसी दिन यह स्पष्ट हो जाएगा कि अंतिम रूप से कितने उम्मीदवार चुनावी मैदान में रहेंगे। नामांकन वापसी के बाद निर्दलीय उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न भी आवंटित किए जाएंगे, जिससे चुनाव प्रचार को और गति मिलेगी। कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के नेता बागियों और निर्दलीय उम्मीदवारों को बैठा कर पार्टी उम्मीदवार के लिए जीत का रास्ता क्लीयर करने में लगे हैं।
प्रत्याशियों के पंफ्लेट तैयार करने वाले प्रकफ्क का नाम और पता पंफ्लेट के नीचे लिखा होना जरूरी होगा। नाम पते के बिना कोई भी पंफ्लेट मान्य नहीं होगा। ऐसा करने पर कार्रवाई की जाएगी।
मनरेगा का सोशल ऑडिट करने वाले लड़ सकेंगे चुनाव
प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनावों को लेकर मनरेगा के सोशल ऑडिट कार्य से जुड़े कर्मियों के लिए राहत भरी खबर है। पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट किया है कि ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (बीआरपी) और विलेज रिसोर्स पर्सन (वीआरपी) अब बिना किसी रोक-टोक के चुनाव लड़ सकेंगे। विभाग द्वारा जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, ये कर्मी नियमित सरकारी कर्मचारी की श्रेणी में नहीं आते हैं। हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 122 (1) (जी) के तहत केवल सरकारी, अनुबंध या अंशकालिक कर्मचारियों के चुनाव लड़ने पर पाबंदी है।
चूंकि सोशल ऑडिट कर्मी आवश्यकतानुसार आकस्मिक (कैजुअल) आधार पर सेवाएं देते हैं, इसलिए उनका पद लाभ के पद के दायरे में नहीं आता है। विभाग ने इस संबंध में राज्य चुनाव आयोग, सभी उपायुक्तों और खंड विकास अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि नामांकन के समय किसी प्रकार का भ्रम न रहे। जिला पंचायत अधिकारी कांगड़ा सचिन ठाकुर ने पुष्टि करते हुए बताया कि विभाग का पत्र प्राप्त हो चुका है और इस बारे में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भेज दिए गए हैं। इस फैसले से अब मनरेगा के तहत काम करने वाले सैकड़ों युवाओं के लिए चुनावी राजनीति में उतरने का रास्ता साफ हो गया है।
नगर निगम चुनाव में इस्तेमाल होने वाली ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को सुरक्षित रखने के लिए स्ट्रांग रूम और वेयर हाउस में त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। इन स्थलों पर पुलिस की तैनाती की गई है। 24 घंटे हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। राज्य निर्वाचन आयोग ने ईवीएम और वीवीपैट मशीनों के भंडारण और सुरक्षा को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। वेयर हाउस और स्ट्रांग रूम में डबल लॉक सिस्टम लागू किया गया है। एक चाबी जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) और दूसरी संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) के पास रहती है। चुनाव अवधि के दौरान किसी भी स्ट्रांग रूम या वेयरहाउस को खोलने के लिए सख्त प्रक्रिया तय की गई है। इसके तहत 24 से 48 घंटे पहले सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को लिखित सूचना देना अनिवार्य है। स्ट्रांग रूम केवल उनके प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ही खोला जाएगा और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। साथ ही, सभी उपस्थित लोगों के हस्ताक्षर लॉग बुक में दर्ज किए जाएंगे। मतदान के बाद मशीनों को सील कर स्ट्रांग रूम में रखा जाएगा। उम्मीदवारों को अपनी सील लगाने की भी अनुमति होगी। मतगणना के दिन सुबह पर्यवेक्षक और उम्मीदवारों की मौजूदगी में ही स्ट्रांग रूम खोला जाएगा।