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शिक्षा सचिव के ब्यौरे से हाईकोर्ट नाखुश, दोबारा मांगी रिपोर्ट

Fri, 13 Jul 2018 12:03 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 13 Jul 2018 12:03 PM IST
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Himaachal high court seeks report again from education secretary arun sharma

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के मामले में प्रदेश उच्च न्यायालय ने शिक्षा सचिव के शपथपत्र को लेकर नाखुशी जताते हुए दोबारा से स्पष्ट रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किए हैं। अब एक अगस्त को दोबारा से मामले की सुनवाई होगी।

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प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष कोर्ट मित्र ने न्यायालय को बताया कि शिक्षा सचिव द्वारा दायर किया गया शपथपत्र शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के मुताबिक नहीं है। विशेषता जब शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार यह स्पष्ट किया गया है कि शिक्षकों की तैनाती विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से होगी। राज्य सरकार ने हालांकि 9 जुलाई को 1331 व 1036 शिक्षकों के पदों को भरने के लिए कदम उठाए हैं।
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कोर्ट मित्र के मुताबिक 14354 पद अभी तक सरकारी स्कूलों में रिक्त पड़े हैं। कोर्ट मित्र ने न्यायालय को यह भी बताया कि शिखा सचिव न्यायालय को रिक्त पदों के बारे में स्पष्ट ब्यौरा देने में नाकाम रहे हैं। उनके अनुसार शिक्षा विभाग की ओर से जो कदम उठाए गए हैं वह पर्याप्त नहीं है।
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शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप उठाए गए कदम नाकाफी हैं। प्रदेश उच्च न्यायालय ने कोर्ट मित्र द्वारा न्यायालय के समक्ष रखी दलीलों व कोर्ट में दायर नोट के दृष्टिगत शिक्षा सचिव को शपथ पत्र दाखिल करने के लिए 1 अगस्त तक का समय दिया है।

इन स्कूलों से तबादलों पर रोक

Himaachal high court seeks report again from education secretary arun sharma

हिमाचल सरकार ने कम शिक्षकों वाले सरकारी स्कूलों से तबादलों पर पूर्ण रोक लगा दी है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम का पालन करते हुए जयराम सरकार ने हाईकोर्ट में तबादलों पर रोक लगाने का शपथपत्र दिया है। अप्रैल महीने में भी शिक्षा सचिव ने इस संदर्भ में आदेश जारी किए थे, लेकिन इसके बावजूद शिक्षकों के धड़ाधड़ तबादले होेते रहे।

अब हाईकोर्ट के संज्ञान लेने के बाद शिक्षा सचिव ने शपथपत्र के माध्यम से नियमों के तहत ही तबादले करने की बात कही है। नियमों की अनदेखी करने वाले अफसरों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का केस दर्ज करने की बात भी कही है। वीरवार को शिक्षा सचिव डॉ. अरुण कुमार शर्मा ने उच्च और प्रारंभिक शिक्षा निदेशकों सहित जिला उपनिदेशकों को आरटीई के नियम पूरे करने वाले शिक्षकों के ही तबादले करने के आदेश दिए हैं।

आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि आरटीई की अनदेखी करते हुए तबादले करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना सहित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक सहित जिला उपनिदेशकों को अब तबादला आदेश जारी करने के लिए प्रमाणपत्र देना होगा कि संबंधित शिक्षक का तबादला होने से आरटीई के नियमों का उल्लंघन नहीं हो रहा है।

आरटीई नियमों की धारा 19(2) में स्पष्ट किया गया है कि प्रारंभिक स्कूलों में 60 बच्चों तक दो शिक्षक होना अनिवार्य हैं जबकि 90 बच्चों के लिए तीन शिक्षक होने चाहिए। 30 छात्रों पर एक शिक्षक होना भी जरूरी है। दस फीसदी से ज्यादा रिक्त पद भी स्कूल में नहीं होने चाहिए।

1421 प्राइमरी स्कूलों में नहीं हो रहा आरटीई एक्ट का पालन- हिमाचल प्रदेश में 10,734 प्राइमरी स्कूल हैं। इनमें से 1421 स्कूल शिक्षा के अधिकार कानून के नियमों को पूरा ही नहीं कर रहे हैं। 47 स्कूल तो पूर्व कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम छह माह के दौरान खोले और अपग्रेड किए। इन 1421 स्कूलों में शिक्षकों की संख्या भी पर्याप्त नहीं है।

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