आईजीएमसी में मेडिकल सर्टिफिकेट और एबीजी टेस्ट अब महंगे
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आईजीएमसी में इमरजेंसी सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए अलग से आपातकालीन मेडिसिन विभाग बनेगा। शनिवार को आईजीएमसी में रोगी कल्याण समिति गवर्निंग बॉडी की बैठक में यह फैसला लिया गया। स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए आईजीएमसी के प्राचार्य प्रो. एसएस कौशल और वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश कुमार को इसका प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजने के आदेश दिए। बैठक में 36 करोड़ का बजट पारित किया गया।
इसके अलावा मेडिकल सर्टिफिकेट बनाना महंगा हो गया है। एबीजी टेस्ट के दाम भी दोगुना हो गए हैं। साथ ही गवर्निंग बॉडी ने भर्ती मरीजों के मेडिकल सर्टिफिकेटट और मेडिकल बोर्ड की फीस को दोगुना करने का फैसला लिया है। इसके अलावा सर्वसम्मति से ड्राइविंग और अन्य मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट जो अब तक बिना किसी फीस के दिए जाते थे, उसकी फीस को सौ रुपये करने का निर्णय भी लिया गया।
इमरजेंसी में वरिष्ठ चिकित्सक की तैनाती किए जाने और जरूरत पड़ने पर हर विभाग से वरिष्ठ चिकित्सकों के बुलाए जाने की व्यवस्था किए जाने का निर्णय भी लिया गया। इसके अलावा पलमनरी मेडिसन विभाग में थोराकोस्कॉपी और स्लीप स्टडी के रेट भी बढ़ाए गए है। इसमें स्पेशल वार्ड में भर्ती मरीज के लिए यह शुल्क 400 रुपये, जबकि प्राइवेट स्पेशल वार्ड मरीजों के लिए एक हजार किया गया है।
मेडिकल लेने को चुकाने होंगे सौ रुपये
गवर्निंग बॉडी की बैठक में ड्राइविंग और अन्य कार्यों के लिए आवश्यक मेडिकल सर्टिफिकेट लेन के लिए भी रेट तय किए गए। अब मेडिकल लेने के लिए सौ रुपये चुकाने होंगे। पूर्व में इसकी कोई फीस नहीं ली जाती थी। फीस लेने के साथ ही अब आईजीएमसी में ऐसे मेडिकल जारी किए जाने का पूरा रिकार्ड भी रखा जाएगा।
आपातकालीन विभाग में मिलेंगी मुफ्त दवाएं- आईजीएमसी के आपातकालीन विभाग और ओपीडी में आने वाले मरीजों को सरकार की कल्याणकारी योजना के तहत मुफ्त दवाएं उपलब्ध होंगी। इसमें आने वाले किसी भी मरीज की आर्थिक स्थिति के प्रमाण के बिना मरीज को आवश्यक दवाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। इससे अस्पताल में आने वाले हर मरीज को दवा के भारी खर्च से राहत मिलेगी।
एक साल में बनेगा एयर सेपरेशन यूनिट- आईजीएमसी में भर्ती मरीजों के लिए ऑक्सीजन की जरूरत को देखते हुए एक साल के भीतर एयर सेपरेशन यूनिट स्थापित करने का फैसला लिया गया। इसके टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पीपीपी मोड पर स्थापित होने वाले इस यूनिट के बाद खराब मौसम और बर्फबारी में आक्सीजन की सप्लाई न आने से होने वाली परेशानी से निजात मिलेगी।
स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष उठाईं मांगें
स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर के शनिवार को आईजीएमसी दौरे के दौरान अस्पताल के अलग-अलग वर्ग के कर्मचारियों ने अपनी मांगों को उनके समक्ष रखा। आरकेएस कर्मचारियों ने कहा है कि जिन लोगों को अस्पताल में कार्य करते हुए 10 से 12 साल हो गए हैं, उन्हें रेगुलर किया जाए। वहीं आउटसोर्स कर्मियों को भी रेगुलर करने की मांग को जोर-शोर से उठाया गया। सफाई यूनियन प्रतिनिधि उमा भारती ने मांग की है कि अस्पताल में सफाई कर्मचारियों को भी विभिन्न श्रेणियों में बांटा जाएं।
अस्पताल का आईना होता है इमरजेंसी विभाग- स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आपातकालीन विभाग किसी भी अस्पताल का आईऩा होता है। उन्होंने आपातकालीन विभाग की सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए आईजीएमसी प्राचार्य और अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक को मेडिसन आपातकालीन विभाग के लिए जरूरत और मरीजों की संख्या के मुताबिक प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजने के आदेश दिए। इस विभाग में वरिष्ठ चिकित्सकों का स्थायी स्टाफ उपलब्ध होगा। मरीजों को वरिष्ठ चिकित्सकों की सेवाएं मिल सकेंगी।
ये सदस्य रहे बैठक में मौजूद- बैठक में गवर्निंग बॉडी के सरकारी और गैर सरकारी सदस्यों में ओम सूद, कंवलजीत सिंह, अर्चना धवन, सोनिया, रक्षा भंडारी, रोहित शर्मा, अतिरिक्त उपायुक्त शिमला यूनुस, केके शर्मा, अतिरिक्त निदेशक आईजीएमसी, डॉ. एसएस कौशल, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश चंद, एमएस केएनएच डॉ. एलएस चौधरी, डा. अश्वनी सूद, आरकेएस सीईओ केआर नेगी, अध्यक्ष कर्मचारी संघ एसएस जोगटा, सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।